सेवानिवृत्ति को जहां अधिकतर लोग विश्राम का पड़ाव मान लेते हैं, वहीं जालंधर की रिटायर प्रिंसिपल कुलजीत कौर ने इसे अपने जीवन की सबसे रचनात्मक पारी में बदल दिया है।
शिक्षा जगत में वर्षों तक अनुशासन और संस्कारों की अलख जगाने वाली कुलजीत कौर आज पेंटिंग के जरिए समाज को रंग, संवेदना और सकारात्मक सोच का संदेश दे रही हैं। वह जालंधर के मिट्ठापुर से रिटायर प्रिंसिपल है जिन्होंने कई स्कूलों में कार्य कर शिक्षा में क्रांति पैदा की है।
उनकी पेंटिंग्स में प्रकृति, पंजाब की लोक संस्कृति, ग्रामीण जीवन, नारी शक्ति, आध्यात्मिक भावनाएं और सामाजिक यथार्थ प्रमुख रूप से झलकते हैं। खेतों में लहलहाती फसलें, ग्रामीण स्त्रियों के भाव, शांत प्राकृतिक दृश्य और सकारात्मक संदेश उनकी कला की विशेष पहचान बन चुके हैं।
“पेंटिंग मेरा अधूरा सपना था”
प्रश्न: शिक्षा के लंबे सफर के बाद पेंटिंग की ओर लौटने की प्रेरणा कैसे मिली?
उत्तर: पेंटिंग मेरा बचपन का शौक था, लेकिन नौकरी और जिम्मेदारियों के बीच वह कहीं दब गया। रिटायरमेंट के बाद लगा कि अब वही करना चाहिए जो आत्मा को सुकून दे। बस वहीं से रंगों के साथ नई शुरुआत हुई।
कैनवास पर उतरता जीवन का अनुभव
प्रश्न: आपकी पेंटिंग्स में कौन-से विषय प्रमुख रहते हैं?
उत्तर: प्रकृति, ग्रामीण जीवन, नारी भावनाएं, पंजाब की संस्कृति और आध्यात्मिक शांति। जो जीवन में देखा और महसूस किया, वही रंगों के माध्यम से कैनवास पर उतार देती हूं।
तीन माध्यम, एक सोच
प्रश्न: आप किस तरह की पेंटिंग करती हैं?
उत्तर: वॉटर कलर, ऐक्रेलिक और ऑयल—तीनों में काम करती हूं। हर माध्यम अलग अनुभव देता है, लेकिन भाव एक ही रहता है सकारात्मकता।
लोगों की सराहना बनी ताकत
प्रश्न: कला जगत से कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है?
उत्तर: स्थानीय प्रदर्शनियों और सामाजिक कार्यक्रमों में पेंटिंग्स को काफी सराहना मिली है। लोगों की प्रतिक्रिया मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा देती है।
महिलाओं और रिटायर्ड लोगों के लिए संदेश
प्रश्न: आज की पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर: उम्र सिर्फ एक संख्या है। अगर मन में सीखने और कुछ नया करने की चाह हो, तो रिटायरमेंट भी जीवन की सबसे खूबसूरत शुरुआत बन सकती है।
आगे का सपना
प्रश्न: भविष्य की योजनाएं क्या हैं?
उत्तर: बच्चों और महिलाओं के लिए एक छोटी आर्ट वर्कशॉप शुरू करना चाहती हूं, ताकि कला के जरिए आत्मविश्वास और सृजनशीलता बढ़े।