जालंधर के एक निजी होटल में जम्मू कश्मीर के आधा दर्जन जवानों ने हथियारों के साथ छापेमारी की और दो युवकों को उठाकर ले गए। इसकी जानकारी जालंधर कमिश्नरेट पुलिस को नहीं दी गई।
एडीसीपी सिटी नरेश डोगरा व बारादरी थाना के एसएचओ सुभाष चंद्र शाम तक होटल में बैठकर माथापच्ची करते रहे। बाद में सुराग मिले कि यह कार्रवाई जेएंडके पुलिस ने की थी।
निजी होटल में सोमवार रात 12.30 पर युवकों ने किराए पर कमरा लिया था। सुबह सात बजे एके-47 से लैस वर्दीधारी जवानों ने होटल में दबिश दी और वहां से दो युवकों को उठाकर जेएंडके चले गए। दोपहर 12 बजे तक स्थानीय कमिश्नरेट पुलिस को इस घटनाक्रम की सूचना नहीं थी।
बारादरी के एसएचओ सुभाष चंद्र गाड़ी लेकर 12 बजे होटल पहुंचे। वहां पर सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग खंगाली तो पता चला कि यह दबिश जेएंडके के जवानों ने की है।
एडीसीपी नरेश डोगरा भी मौके पर आए। छानबीन शुरू हुई तो पता चला कि यह कार्रवाई जेएंडके के जवानों ने स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना की और यहां से राजौरी के रहने वाले दो युवकों रतिश शर्मा व विकास गुप्ता को ले गए।
जेएंडके पुलिस से संपर्क साधा तो पता चला कि वहां पर दो गुटों में झगड़ा हुआ था। इसमें वरुण नाम का युवक घायल हुआ था। उसकी शिकायत पर केस दर्ज किया था। पुलिस रतिश व विकास का मोबाइल लोकेशन से उनका पीछा कर रही थी।
एडीसीपी नरेश डोगरा का कहना है कि जेएंडके पुलिस की टीम ने स्थानीय पुलिस को बिना बताए गिरफ्तार की। इस घटना के बाद वहां के सीनियर अधिकारियों से बात की। जेएंडके के अधिकारियों ने कहा है कि उनके मुलाजिमों ने गलती की है। इसके लिए मुलाजिमों ने अपनी गलती मान ली है।