रूस-यूक्रेन युद्ध ने भारत की इंडस्ट्री पर व्यापक असर डालना शुरू कर दिया है। खासकर लोहे के भाव तेजी से उछलने लगे हैं और उद्यमियों की सांसें उखड़ने लगी हैं। करोड़ों रुपये के ऑर्डर कंपनियों ने पकड़ रखे हैं लेकिन तैयार माल कैसे डिलीवर करना है, इसका लोहे पर आधारित इकाईयों के पास कोई हल नहीं है।
नार्दन चैंबर ऑफ मीडियम एंड स्माल स्केल इंडस्ट्री के प्रधान शरद अग्रवाल का कहना है कि शिपिंग के दाम तीन दिन में छह गुणा बढ़े हैं। निर्यातकों के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है कि विदेशों में माल कैसे भेजा जाए। वहीं स्टील और आयरन के दाम आसमान को छूने लगे हैं। रूस व यूक्रेन विवाद में स्टील के दाम 13 फीसदी बढ़ गए हैं। निर्यातकों ने तो विदेशों में ऑर्डर बुक कर रखे हैं, माल की डिलीवरी कैसे होगी। केंद्र सरकार को वह इस बारे में मांगपत्र लिखने जा रहे हैं कि इंडस्ट्री को बचाने की जरूरत है। दाम कंट्रोल पर फोकस करना होगा, शिपिंग के दाम ही तेजी से बढ़ गए हैं। रोजाना एक बड़े निर्यातक पर 1.5 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ गया है, वह कैसे सहन कर सकेगा? अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो इंडस्ट्री दम तोड़ देगी।
प्रसिद्ध निर्यातक एक्टिव टूल के मालिक नरिंदर सिंह भारज का कहना है कि दाम कंट्रोल पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। पिछले चंद दिनों में स्टील के दाम चार हजार रुपये टन बढ़ गए हैं। केंद्र सरकार को जल्द स्टील कंपनियों की मीटिंग बुलानी चाहिए, जिसमें कारोबारियों को भी शामिल किया जाए। इसमें पूछा जाए कि स्टील और धातुओं के दामों में इजाफा क्यों हो रहा है? इस पर जल्द अंकुश लगना चाहिए, ताकि आम जनता और व्यापारी को महंगाई की मार से राहत मिले। लोहा, कॉपर, ब्रास समेत अन्य धातु खनिज के रेट रोजाना बढ़ रहे हैं। इससे लघु कुटीर उद्योग खतरे में आ गए हैं। सरकार से आग्रह है कि इससे जुड़ी एक रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाए। स्टील कंपनियों की तरफ से भी संकट के समय में मनमानी शुरू कर दी गई है। इंडस्ट्री को ऑक्सीजन की जरूरत है।