फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रूस-यूक्रेन युद्ध का असर: तीन दिन में चार हजार प्रति टन बढ़े लोहे के भाव, इंडस्ट्री में मचा हाहाकार 

Sat, 26 Feb 2022 10:49 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

पिछले साल दिसंबर में पिग आयरन 33 रुपये किलो था और अब मौजूदा वक्त में 51 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। जबकि तीन दिन पहले पिग आयरन का दाम 46 रुपये प्रति किलो था।
विज्ञापन
लोहे के दाम बढ़े। - फोटो : फाइल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रूस-यूक्रेन युद्ध ने भारत की इंडस्ट्री पर व्यापक असर डालना शुरू कर दिया है। खासकर लोहे के भाव तेजी से उछलने लगे हैं और उद्यमियों की सांसें उखड़ने लगी हैं। करोड़ों रुपये के ऑर्डर कंपनियों ने पकड़ रखे हैं लेकिन तैयार माल कैसे डिलीवर करना है, इसका लोहे पर आधारित इकाईयों के पास कोई हल नहीं है।

विज्ञापन


फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन के प्रधान नरिंदर सग्गू का कहना है कि देश में लोहे और अन्य धातुओं की अचानक बढ़ रही कीमतों से कारोबारी चिंता में आ गए हैं। स्टील व आयरन के दाम में पिछले तीन दिन में अचानक उछाल आने से इंडस्ट्री में हाहाकार मच गया है। हालात यह है कि पिग आयरन की कीमत पिछले तीन दिन में 4 हजार रुपये टन बढ़ी है। उद्यमी इस बात से चिंतित है कि कोरोना काल से इंडस्ट्री पहले ही संकट में है। ऊपर से कच्चे माल की कीमत तेजी से बढ़ने से माल की डिलीवरी कैसे होगी। पिछले साल दिसंबर में पिग आयरन 33 रुपये किलो था और अब मौजूदा वक्त में 51 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। जबकि तीन दिन पहले पिग आयरन का दाम 46 रुपये प्रति किलो था।

शिपिंग के दाम तीन दिन में छह गुणा बढ़े

नार्दन चैंबर ऑफ मीडियम एंड स्माल स्केल इंडस्ट्री के प्रधान शरद अग्रवाल का कहना है कि शिपिंग के दाम तीन दिन में छह गुणा बढ़े हैं। निर्यातकों के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है कि विदेशों में माल कैसे भेजा जाए। वहीं स्टील और आयरन के दाम आसमान को छूने लगे हैं। रूस व यूक्रेन विवाद में स्टील के दाम 13 फीसदी बढ़ गए हैं। निर्यातकों ने तो विदेशों में ऑर्डर बुक कर रखे हैं, माल की डिलीवरी कैसे होगी। केंद्र सरकार को वह इस बारे में मांगपत्र लिखने जा रहे हैं कि इंडस्ट्री को बचाने की जरूरत है। दाम कंट्रोल पर फोकस करना होगा, शिपिंग के दाम ही तेजी से बढ़ गए हैं। रोजाना एक बड़े निर्यातक पर 1.5 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ गया है, वह कैसे सहन कर सकेगा? अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो इंडस्ट्री दम तोड़ देगी।

स्टील के दाम चार हजार रुपये टन बढ़े

प्रसिद्ध निर्यातक एक्टिव टूल के मालिक नरिंदर सिंह भारज का कहना है कि दाम कंट्रोल पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। पिछले चंद दिनों में स्टील के दाम चार हजार रुपये टन बढ़ गए हैं। केंद्र सरकार को जल्द स्टील कंपनियों की मीटिंग बुलानी चाहिए, जिसमें कारोबारियों को भी शामिल किया जाए। इसमें पूछा जाए कि स्टील और धातुओं के दामों में इजाफा क्यों हो रहा है? इस पर जल्द अंकुश लगना चाहिए, ताकि आम जनता और व्यापारी को महंगाई की मार से राहत मिले। लोहा, कॉपर, ब्रास समेत अन्य धातु खनिज के रेट रोजाना बढ़ रहे हैं। इससे लघु कुटीर उद्योग खतरे में आ गए हैं। सरकार से आग्रह है कि इससे जुड़ी एक रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाए। स्टील कंपनियों की तरफ से भी संकट के समय में मनमानी शुरू कर दी गई है। इंडस्ट्री को ऑक्सीजन की जरूरत है।

विज्ञापन

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें