पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की तरफ से बीडीएस के चार सौ विद्यार्थियों
के दाखिले रद किए जाने से फैसले से यहां के दशमेश डेंटल कॉलेज के भी 40
विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। अपने भविष्य को लेकर इन विद्यार्थी व उनके
अभिभावकों ने शनिवार को बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ.
राज बहादुर से मुलाकात करके न्याय की गुहार लगाई। इन्होंने पिछले वर्ष बाबा
फरीद विवि व डीआरएमई पंजाब की चेतावनी के बावजूद बीडीएस में दाखिला ले
लिया था। उच्च न्यायालय के फैसले की वजह से ही ये विद्यार्थी शुक्रवार को
शुरू हुए बीडीएस फर्स्ट ईयर की वार्षिक परीक्षा में भी शामिल नहीं हो पाए
हैं।
वीसी डॉ. राज बहादुर से मिले अभिभावकों ने निजी डेंटल कॉलेजों पर
ठगने के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें दाखिला देते समय बताया
गया था कि डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने देश भर के बाकी राज्यों में बीडीएस
में दाखिले के लिए कुछ ऐसी ही व्यवस्था कर रखी है जिसमें किसी तरह के
प्रवेश परीक्षा में शामिल होना जरूरी नहीं है। वीसी डॉ. राज बहादुर ने
स्पष्ट किया कि विवि समेत राज्य सरकार ने दाखिले के समय ही पब्लिक नोटिस
जारी करके साफ कर दिया था कि निजी कॉलेजों की तरफ से किए जा रहे दाखिले
पूर्ण रूप से अवैध हैं। इसके लिए विद्यार्थी खुद ही जिम्मेवार होंगे।
अभिभावकों
की अगुवाई कर रहे शिअद अमृतसर के नेता जसकरण सिंह काहन सिंह वाला व सुरजीत
सिंह अराईयांवाला ने कहा कि इस फैसले से विद्यार्थियों के दो वर्ष खराब
होंगे और ऐसे में उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाने की
जरूरत है।
वीसी डॉ. राज बहादुर ने अभिभावकों की मांग पर सिर्फ
एआईपीएमटी व पंजाब बीडीएस की प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने वाले
स्टूडेंट्स के दाखिला बहाल करने के संदर्भ में राज्य सरकार को पत्र लिखने
का भरोसा दिया और न्याय के लिए उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करने की सलाह
दी।
दशमेश कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल वाईपी कांसल ने कहा कि दाखिले देते
समय ही स्टूडेंट्स व अभिभावकों को स्पष्ट कर दिया गया था कि वह अपने रिस्क
पर ही दाखिला लें। चूंकि उन्हें विवि व सरकार से मंजूरी नहीं मिली है।