23 अप्रैल 2022 को जमशेर सिंह निवासी गुरजेपाल नगर जालंधर ने कमिश्नर को शिकायत दी थी कि उनकी माता जोगिंदर कौर की गलत इलाज के बाद मौत हो गई और डॉ. संजीव की डिग्री फर्जी है। जब जांच की तो यूनिवर्सिटी ने आरटीआई में जवाब दिया कि संजीव पांडे नाम के व्यक्ति ने उनके यहां से एमएएमएस नहीं की है।
जालंधर में फुटबॉल चौक के पास स्थित हार्ट सेंटर में फर्जी बीएएमएस और एमएएमएस डिग्री वाले डॉक्टर संजीव पांडे उर्फ संजय निवासी बूटा पिंड के मामले ने स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख दिया है। पिछले दो-तीन साल से हार्ट सेंटर जालंधर में सेवाएं दे रहे डॉक्टर की देखरेख में महिला मरीज की मौत होने के बाद हंगामा मचा। मरीज के बेटे ने डॉक्टर पर फर्जी डिग्री और गलत इलाज से मौत के आरोप लगाए थे।
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जांच के बाद डॉक्टर संजीव पांडे पर मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद वह भूमिगत हो गए। वहीं मामले की भनक लगते ही डॉक्टर अमित जैन (एमडी, दिल के रोगों के माहिर) पिछले हफ्ते मलयेशिया चले गए। पुलिस की जांच में पता चला कि संजीव पांडे ने हार्ट सेंटर जालंधर में बीएएमएस और एमएएमएस की डिग्री दिखाई थी, जिसे बिना पड़ताल किए रख लिया गया था। संजीव डॉक्टर अमित जैन की देखरेख में मरीजों का इलाज करता था।
23 अप्रैल 2022 को जमशेर सिंह निवासी गुरजेपाल नगर जालंधर ने कमिश्नर को शिकायत दी थी कि उनकी माता जोगिंदर कौर की गलत इलाज के बाद मौत हो गई और डॉ. संजीव की डिग्री फर्जी है। जब जांच की तो यूनिवर्सिटी ने आरटीआई में जवाब दिया कि संजीव पांडे नाम के व्यक्ति ने उनके यहां से एमएएमएस नहीं की है। इसके बाद सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से रजिस्ट्रार पंजाब आयुर्वेदिक का यूनानी सिस्टम ऑफ मेडिसिन और राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस कर्नाटक को पत्र लिखकर बीएएमएस की डिग्री की पात्रता की जानकारी मांगी। इसमें पता चला कि संजीव ने पंजाबी या कर्नाटक यूनिवर्सिटी से बीएएमएस भी नहीं किया है और उसकी सभी डिग्री फर्जी है।
मेडिकल बोर्ड ने डॉक्टर जैन को बेकसूर बताया
हार्ट केयर सेंटर में संजीव पांडे बतौर सेकंड इन कमांड था जो एमडी डॉक्टर अमित जैन की देखरेख में मरीजों का इलाज करता था। संजीव को उन्होंने ही नियुक्त किया था। थाना दो प्रभारी गुरप्रीत सिंह ने कहा कि डॉक्टर अमित जैन से पूछताछ करेंगे कि उन्होंने संजीव की डिग्री वेरीफाई क्यों नहीं की। वहीं मेडिकल बोर्ड ने डॉक्टर अमित जैन को पूरे प्रकरण में बेकसूर बताया है और कहा कि डॉक्टर संजीव की नियुक्ति वैसे ही हुई, जैसे अन्य डॉक्टरों की होती है।