कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी (पीआर) हासिल करना अब आसान नहीं होगा, कनाडा सरकार ने एलएमआईए (लेबर मार्केट इंपेक्ट एसेसमेंट) के 50 अंक पर प्रतिबंध लगा दिया है। यानी अब जो लोग पीआर का आवेदन करेंगे उनके कॉम्प्रिहेंसिव रैंकिंग सिस्टम (सीआरएस) स्कोर को छूना होगा। हालात ये हैं कि इस समय लाखों पंजाबी एलएमआईए लेकर कनाडा में वर्क परमिट पर हैं।
अमर उजाला ने इसका खुलासा पहले ही कर दिया था कि किसी भी वक्त कनाडा की सरकार इस पर प्रतिबंध लगा सकती है। कनाडा के मंत्री ने आधिकारिक रूप से इस पर पाबंदी लगा दी है।
एलएमआईए वह डॉक्यूमेंट है, जिसके जरिये एक कंपनी यह साबित करती है कि उसे जॉब के लिए कनाडाई कर्मचारी नहीं मिल और अब उसे विदेशी वर्कर रखना पड़ा है। ऐसे में कनाडा सैर-सपाटा के लिए गए लोग 25-30 लाख रुपये में एलएमआईए खरीदकर वहां पर वर्क परमिट हासिल कर लेते थे। बाद में कनाडा की पीआर लेते समय उनको स्कोर में 50 अंक अतिरिक्त मिलते थे। मौजूदा साल में कनाडा में 4 लाख 85 हजार लोगों को पीआर देने की योजना है और इसमें करीब 40 फीसदी एलएमआईए धारक हैं।
एक्सप्रेस एंट्री प्रोग्राम के जरिये परमानेंट रेजिडेंसी उन्हीं लोगों को दी जाती है, जिनका सीआरएस स्कोर अच्छा होता है। वर्क एक्सपीरियंस, अंग्रेजी भाषा पर पकड़, उम्र, एजुकेशनल क्वालीफिकेशन जैसे फैक्टर्स के आधार पर सीआरएस स्कोर बढ़ता जाता है। मगर अब सीधे तौर पर 50 पॉइंट का नुकसान हो सकता है।
कनाडा में हाल ही में इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव किया गया है। अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या को सीमित कर दिया है। इस वजह से भारत से कनाडा में पढ़ने जाने वाले भारतीय विद्यार्थियों ने एलएमआईए के जरिये प्वाइंट्स बढ़ाना शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें पीआर मिल सके। एक्सप्रेस एंट्री सिस्टम योग्य आवेदकों को अपनी जानकारी देने की सुविधा देता है, जिसके बाद कनाडाई अधिकारी ड्रॉ के जरिये लोगों का सेलेक्शन करते हैं।