कनाडा के पीएम जस्टिन त्रूदो ने पद से इस्तीफा दे दिया है लेकिन उनके कार्यकाल में मंदिरों पर लगातार हमले हुए। इतना ही नहीं, पिछले साल हिंदू सभा मंदिर में रविवार (3 नवंबर 2024) को खालिस्तानी कट्टरपंथियों ने जमकर बवाल काटा। इससे हिंदुओं व सिखों के बीच खासा तनाव पैदा हुआ।
कनाडा की नामचीन हस्ती जोगिंदर बासी का कहना है कि कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन त्रूदो खालिस्तान समर्थकों की तरफदारी करते रहे हैं। इसने कनाडा में हालात खराब किए और भारत से रिश्ते भी बिगाड़ दिए।
कब-कब निशाने पर आए हिंदू मंदिर
1- 2024 जुलाई में एडमॉन्टन में हिंदू मंदिर स्वामीनारायण मंदिर में तोड़फोड़ की गई। मंदिर के गेट और पीछे की दीवार पर भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक पोस्टर चिपका दिए गए थे, जिस पर हरदीप सिंह निज्जर की तस्वीर भी लगी थी।
2- सितंबर (2023) में ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे में स्थित श्री माता भामेश्वरी दुर्गा देवी में तोड़फोड़ की घटना घटी थी। मंदिर पर काले रंग के स्प्रे से भारत विरोधी संदेश लिखे गए थे। मंदिर की दीवारों पर लिखा गया, “पंजाब भारत नहीं है।
3- वर्ष अगस्त (2023) में खालिस्तान समर्थकों ने मेट्रो वैंकूवर क्षेत्र में बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था मंदिर को निशाना बनाया था
4- अप्रैल में ओंटारियो के विंडसर शहर में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर को निशाना बनाया गया था। यही नहीं मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी और पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक नारे भी लिखे गए थे।
5- कनाडा के मिसिसागा स्थित श्रीराम मंदिर को खालिस्तानी समर्थकों द्वारा निशाना बनाया गया था। यह घटना फरवरी 2023 की है। मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे गए थे।
6- कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में खालिस्तान समर्थकों द्वारा गौरी शंकर मंदिर को अपवित्र किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी 2023 में प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस से जुड़े खालिस्तान समर्थकों द्वारा मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी चित्र बनाए गए थे।
2022 के बाद 20 से ज्यादा मंदिरों पर हमला
कनाडा के नामचीन जोगिंदर बासी का कहना है कि 2022 के बाद से कट्टरपंथियों ने कनाडा में लगभग 20 से अधिक हिंदू मंदिरों को इसी तरह से निशाना बनाया है। हिंदुओं और उनके मंदिरों से नफरत करने वाले अभी भी कनाडा में खुलेआम घूम रहे हैं। कनाडा की लॉ इंफोर्समेंट एजेंसियां अभी तक इन घटनाओं के पीछे के लोगों की पहचान नहीं कर सकी हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे हाथों में खालिस्तान समर्थक झंडा लेकर ये चरमपंथी हिंदुओं पर हमला कर रहे हैं। उनके मंदिरों को निशाना बना रहे हैं।
भारत के विरोध में प्रदर्शन करने भारतीय तिरंगे को जलाने और उसे पैरों तले दबाने से भी जब इन खालिस्तान समर्थकों का मन नहीं भरता तब वह किसी न किसी मंदिर पर हमला कर देते हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक कनाडा में हिंदू और उनके मंदिरों पर इसी तरह एक के बाद एक हमले होते रहेंगे? त्रूदो सरकार में खालिस्तान समर्थक आतंकियों के खिलाफ यहां की सरकार कोई सख्त कार्रवाई नहीं करती? आखिर इन्हें किनका समर्थन प्राप्त है, जो सड़कों पर खुलेआम हिंदुओं, भारतीय तिरंगा का अपमान करते हुए भी ये लोग नहीं डरते। क्यों इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। यह सबको पता है कि कनाडा की धरती पर बैठकर भारत विरोधी एजेंडा चलाया गया।