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कैप्टन दलित वोट बैंक को लेकर चिंतित

Fri, 03 Jul 2015 10:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
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कैप्टन अमरिंदर सिंह जालंधर से अपने मास कांटेक्ट प्रोग्राम की शुरुआत कर गए हैं। साथ ही दलित समुदाय को भी अपना वोट बैंक बनाने की राजनीति का पौधा भी लगा गए हैं। उन्होंने 2017 विस चुनावों और सरकार के बाद वाल्मीकि समुदाय के लोगों को बनता हक देेने की बात कह अपना दांव चल दिया है।
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यही नहीं, राष्ट्रीय एससीएसटी आयोग के वाइस चेयरमैन डॉ. राजकुमार वेरका के साथ होटल में लंबी बातचीत इसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।
डॉ. वेरका अमृतसर सेे विधायक के साथ राष्ट्रीय आयोग के वाइस चेयरमैन भी हैं। इस समय उन्होंने पंजाब में दलितों के खिलाफ हो रही धक्केशाही को रोकने के लिए पूरा झंडा उठा रखा है। बुधवार को जालंधर धीना में रैली करने के बाद शाम को कैप्टन एक होटल में रुके। कुछ समय बाद ही डॉ. राजकुमार वेरका पहुंच गए। उन्होंने बुधवार रात को करीब साढ़े 10 बजे तक कैप्टन अमरिंदर सिंह से लंबी बातचीत की। वीरवार सुबह साढ़े नौ बजे से लेकर एक घंटा लगातार दोबारा दलित वोटरों व सीटों पर डॉ. वेरका से बातचीत चली।


दरअसल, दोआबा में दलित वोट बैंक ही जीत हार का फैसला करता है। दोेआबा में 45 फीसदी के करीब वोट दलितों के हैं। इसमें वाल्मीकि समाज, रविदास भाईचारा के अलावा भगत बिरादरी का वोट बैंक है। कांग्रेस का पंजाब में दो बार सत्ता से बाहर रहने की वजह से दलित वोट बैंक की नाराजगी ही थी। यही वजह थी कि कैप्टन 2007 और 2012 में सत्ता से दूर चले गए। पिछली बार तो कांग्रेस को दोआबा में आरक्षित आठ सीटों में से सिर्फ एक ही मिल पाई थी। जालंधर में जहां पर बहुसंख्यक दलित वोटर हैं, यहां से 2007 में नौ में से सिर्फ एक सीट और 2012 में तो कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई थी।
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दलित समाज का वोट कांग्रेस का परमपरागत वोट बैंक माना जाता रहा है। भाजपा ने इसको पूरी तरह से भांपकर दोआबा से रविदासिया समाज से संबंधित होशियारपुर से सांसद विजय सांपला को केंद्रीय राज्यमंत्री बना दिया है। वहीं पंजाब भाजपा विधायक दल के नेता की कुर्सी भी दलित विधायक भगत चुन्नी लाल के पास है। कैप्टन ने जिस तरह से बातचीत में खुलकर वाल्मीकि व दलित समुदाय को पूरा हक देने की बात की है, उसको राजनीतिक विशेषज्ञ दलित वोट बैंक व भविष्य की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जो कांग्रेस से खिसकर भाजपा और शिअद की तरफ जा चुका है।
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