पंजाब के जालंधर शहर के मुख्य चौराहे ज्योति चौक व नकोदर चौक पर सिख फेडरेशन यूके द्वारा हिंदुत्व के खिलाफ बोर्ड लगाने से माहौल तनावपूर्ण हो गया।
शिव सेना के नेताओं ने बोर्ड को उतारने की कोशिश की लेकिन मौके पर सिख जत्थेबंदियां, दल खालसा और फेडरेशन के नेता पहुंच गए और धक्कामुक्की होने लगी। सूचना पाकर पुलिस कमिश्नर राम सिंह, एडीसीपी सुखदेव सिंह, एडीसीपी हरप्रीत मंडेर, एडीसीपी नरेश डोगरा समेत सैकड़ों मुलाजिम पहुंच गए और पूरे इलाके को घेर लिया गया।
यह बोर्ड मंगलवार को अचानक शहर में लगाया गया। इस बोर्ड के बारे में खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली और इससे पहले कि प्रशासन चौकस होता, शिव सेना के नेता आशीष अरोड़ा, वरिंदर शर्मा, अजय गिल, तजिंदर सहदेव, मोहिंदर वर्मा आदि पहुंचे और उन्होंने बोर्ड को उतारने की कोशिश की।
पुलिस के पहुंचने से पहले ही सिख जत्थेबंदियां, दल खालसा व फेडरेशन के नेता भी पहुंच गए। धक्कामुक्की शुरू हो गई लेकिन उसी समय पुलिस पहुंची और उन्होंने शिव सेना नेताओं को एक तरफ कर दिया। सिख जत्थेबंदियों में शामिल गुरमीत सिंह बिट्टू, तजिंदर सिंह परदेसी, हरप्रीत सिंह नीटू, बलजीत आहलूवालिया, आईएस बग्गा, सुरिंदर सिंह गोल्डी आदि ने जमकर नारेबाजी की।
तनाव बढ़ता देखकर आला अधिकारियों ने पूरे इलाके को घेर लिया और चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात कर दी गई। पुलिस ने पास की कुछ दुकानों की सर्च की तो वहां से किरपाण व दातर बरामद हुए।
दोनों तरफ से क्रास केस दर्ज
तनाव के बाद कमिश्नर राम सिंह ने एडीसीपी सिटी नरेश डोगरा के साथ मिलकर सिख जत्थेबंदियां व शिव सेना के नेताओं को बुलाया। शिव सेना नेता इस बात पर अडिग थे कि जब उन्होंने बोर्ड पर हिंदुत्व के खिलाफ पढ़ा तो उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची। यह बोर्ड कैसे लगाया गया? सिख जत्थेबंदियों का तर्क था कि अगर इस बोर्ड को उतारा जाना था तो इसके लिए प्रशासन से शिकायत की जाती। शिव सेना के नेताओं द्वारा खुद बोर्ड उतारने से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। आखिरकार तीन घंटे तक चली इस बैठक के बाद दोनों तरफ से क्रास केस दर्ज कर लिए गए। शाम को बोर्ड पर आपत्तिजनक अक्षरों को खुद ही जत्थेबंदियों ने स्याही से मिटा दिया।
कमिश्नर ने चौकसी बरतने के आदेश दिए
कमिश्नर राम सिंह ने मातहत अधिकारियों को चौकसी बरतने के आदेश दे दिए हैं और शरारती तत्वों से निपटने के लिए कहा है।