भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और उनकी टीम शुक्रवार को जालंधर में
होने वाली भाजपा एससी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में हिस्सा लेने
पहुंचेंगे। दलितों के गढ़ दोआबा में भाजपा की इस कार्यकारिणी को उन 34
आरक्षित सीटों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनके सहारे अभी तक कांग्रेस या
फिर शिरोमणि अकाली दल सत्ता में काबिज होता आ रहा है।
भाजपा की यह
एक्सरसाइज दलित वोट बैंक में सेंधमारी का पहला कदम है, जिससे विरोधी दलों
के अलावा शिअद के शीर्ष नेताओं की चिंता भी बढ़ने लगी है। इससे पहले भाजपा
रविदासिया समाज के जमीनी नेता विजय सांपला को केंद्र में राज्यमंत्री बनाकर
अपना दलित कार्ड खेल चुकी है। पंजाब का इतिहास इसी बात का गवाह है कि जिस
पार्टी को अधिक आरक्षित सीट मिली हैं, उसी की सूबे में सरकार बनी है। 2002
में अगर कैप्टन सीएम बने तो उनको दोआबा में खासा बहुमत मिला था, इसके बाद
2007 और 2012 में शिअद व भाजपा अधिकतर आरक्षित सीटों को जीतकर सूबे में
सरकार बनाने में सफल रही है।
भाजपा के शीर्षपदस्थ सूत्रों की माने तो
चिंता 34 विधानसभा सीटों को लेकर भी है, जिसमें से अभी तक भाजपा सिर्फ पांच
पर ही चुनाव लड़ती आई है। पंजाब में भाजपा पहले ही दलित वोट बैंक को लेकर
काफी गंभीर चल रही थी, इसी लिए पंजाब में 2012 में चुनाव के बाद भगत चुन्नी
लाल को विधायक दल का नेता बनाया गया था।
इसके बाद पंजाब का प्रभारी भी
दलित समुदाय के रामशंकर कठेरिया को बनाया गया, जिनको अब केंद्र में
राज्यमंत्री बनाया गया है। पंजाब में 117 में से 34 सीटें आरक्षित हैं,
जिसमें से पांच सीटों पर ही भाजपा चुनाव लड़ी हैं। बाकी सीटों पर शिअद ने
अपना ही कब्जा रखा है।
इन पांच सीटों में से भाजपा के तीन विधायक भगत
चुन्नी लाल, फगवाड़ा से सोमप्रकाश और सीमा देवी ही जीत पाई हैं। रविदासिया
समाज की दोआबा में 40 फीसदी वोट हैं, जो तीन जिलों में जीत हार का फैसला
करती हैं और भाजपा ऐसे नेताओं को पहली कतार में ला रही है। इन्हीं नेताओं
के कहने पर भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी जालंधर में रखी है। पार्टी
के एक नेता ने बताया कि 34 सीटें तो रिजर्व हैं जबकि दोआबा की हर सीट पर
जीत-हार का फैसला दलितों द्वारा ही होता है क्योंकि औसतन 35 से 40 फीसदी
वोट दलितों के हैं। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव तरुण चुघ ने सर्किट हाउस में
मीटिंग के दौरान साफ कह दिया कि अगर प्रधान अमित शाह ने पंजाब के जालंधर
में भाजपा एसएसी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक रखी है तो इसके
मायने सभी को समझ ही लेने चाहिए।