दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रवक्ता स्वामी अरविंदानंद ने सवाल खड़ा किया है कि पिछले 30-35 सालों में पुत्र को पिता की याद क्यों नहीं आई? आशुतोष महाराज ने तो अपने परिवार की कभी चर्चा तक नहीं की। वैसे भी सन्यासियों को अपने अतीत से कोई सारोकार नहीं होता।
स्वामी अरविंदानंद ने कहा कि पिछले कई दिनों से आशुतोष महाराज के बारे में कई आधारहीन खबरें सुनने को मिल रही हैं। आशुतोष महाराज का पूरा जीवन अध्यात्मिक जागृति व सामाजिक भलाई को समर्पित है। उनका गहन समाधि में जाना परम विज्ञान का एक हिस्सा है। बेशक आज विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली हो, लेकिन सृष्टि के बहुत सारे रहस्यों से विज्ञान अब भी अनभिज्ञ है।
स्वामी ने कहा कि कई ताकतें डेरे को कमजोर करने की साजिश रच रही हैं। इसी कड़ी का हिस्सा पूर्ण सिंह है, जो खुद को आशुतोष महाराज का पूर्व चालक बता रहा है। हकीकत यह है कि डेरे में कोई नई कार तो दूर पुरानी कार भी नहीं थी।