जीरा के सरकारी अस्पताल से मोगा के सरकारी अस्पताल जा रही एक गर्भवती महिला ने एंबुलेंस में ही एक बच्ची को जन्म दे दिया। एंबुलेंस में न कोई डाक्टर और न ही अस्पताल का स्टाफ था। एंबुलेंस की हालत भी खस्ता थी।
मां-बच्ची की जान बचाने के लिए रास्ते से ही एंबुलेंस को वापस जीरा की तरफ मोड़ लिया और जीरा पहुंचने पर मां-बच्ची की जान बचाई। उधर, फिरोजपुर के सिविल सर्जन डा. जय सिंह ने कहा कि इस संबंधी उन्हें जानकारी नहीं है। इसकी जीरा के एसएमओ से रिपोर्ट मांगेंगे और इस घटना की जांच की जाएगी। आरोपी स्टाफ के खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित महिला का पति विवेक जैन ने बताया कि उसकी पत्नी को बुधवार सुबह से ही पेट में दर्द था। उसे चेकअप के लिए जीरा के सरकारी अस्पताल में लेकर गए। पत्नी सारा दिन दर्द से तड़पती रही। शाम तीन बजे कहा कि महिला का आपरेशन होना है और उसे मोगा के सरकारी अस्पताल में रेफर कर दिया। जब 108 एंबुलेंस को फोन किया वह नहीं पहुंची। सिविल अस्पताल जीरा की खस्ता हालत वाली एंबुलेंस पर उन्हें मोगा भेज दिया।
एंबुलेंस में न अस्पताल का कोई स्टाफ था और न ही डाक्टर था। जब वे गांव खोसा दल पहुंचे तो दर्द बढ़ गया और वहीं एंबुलेंस में ही महिला ने शाम चार बजकर 53 मिनट पर एक बच्ची को जन्म दिया। एंबुलेंस की खिड़कियों के शीशे ठीक नहीं थे जिस कारण हवा बच्चे व मरीज को लग रही थी। मोगा पहुंच नहीं सकते थे। दोनों की जिंदगी खतरे में थी और दोनों की जान बचाने के लिए एंबुलेंस को वापस जीरा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचते ही डाक्टरों ने मां-बच्चे की जान बचाई। विवेक ने कहा कि सरकारी अस्पताल में कोई बंदोबस्त नहीं है। आपरेशन का नाम लेकर उन्हें मोगा के सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया। विवेक ने कहा कि पत्नी व बच्ची की बड़ी मुश्किल में जान बची है। विवेक ने कहा जो कुछ उसके साथ हुआ है ऐसा किसी और मरीज के साथ नहीं होना चाहिए।