अबोहर में टयूबवेल से धान की सिंचाई करता हुआ किसान।
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अबोहर क्षेत्र और पूरे फाजिल्का जिले में मानसून की बेरुखी से किसानों के लिए मुश्किल बढ़ती जा रही हैं। कई क्षेत्रों के किसान महंगा डीजल जलाकर ट्यूबवेलों से धान की सिंचाई कर रहे हैं।
इससे धान की फसल पर लागत और बढ़ रही है। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की थी कि जून के अंतिम सप्ताह में मानसून की बरसात शुरू हो जाएगी लेकिन पूरा जून बीतने के बाद जुलाई के पहले सप्ताह में भी बरसात ने दस्तक नहीं दी।
रविवार सुबह ही पड़ोसी जिले मुक्तसर साहिब में भारी बरसात हुई लेकिन अबोहर, फाजिल्का, जलालाबाद व बल्लूआना सहित पड़ोसी राज्य राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ आदि भी अभी तक मानसूनी बरसात से वंचित हैं। यहां पड़ रही भयंकर गर्मी फसलों के लिए हानिकारक साबित हो रही है। इससे एक ओर जहां नरमा की फसल में सफेद मक्खी के प्रकोप का भय बना हुआ है वहीं दूसरी ओर धान की फसल में भी यथोचित विकास नहीं हो रहा है। कृषि माहिरों का कहना है कि नहरी व जमीनी पानी से लगातार सिंचाई के बाद भी बरसाती पानी धान की फसल के लिए वरदान साबित होता है।
गांव आलमगढ़ के धान उत्पादक किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने करीब 50 किल्ले में धान की बिजाई की है। नहरी पानी पर्याप्त न होने के कारण उन्हें ट्यूबवेल चलाकर धान की सिंचाई करनी पड़ रही है। इसी प्रकार गांव डंगरखेड़ा निवासी किसान हरफूल सिंह मान, बूटा सिंह, भजन लाल, महावीर ने बताया कि अगर शीघ्र ही बरसात न हुई तो धान की फसल उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो सकती है। इसके अलावा कई नरमा उत्पादक किसान भी ट्यूबवेलों से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं।