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रूस-यूक्रेन युद्ध: अंग्रेजी न जानने वाले युवा रशियन सीखने जाते हैं यूक्रेन, युवाओं के साथ एजेंटों का खिलवाड़

Sat, 26 Feb 2022 01:52 AM IST
पंजाब ब्‍यूरो सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

पंजाब के युवाओं का क्रेज यूरोप की ओर है पर यूरोप का शनैगन वीजा आसानी से नहीं मिलता है। इटली, फ्रांस के साथ कई यूरोपियन देश पंजाब के युवाओं को वीजा नहीं देते हैं। एजेंटों ने पंजाब के युवाओं को शनैगन देश पहुंचाने के लिए यूक्रेन का सहारा लिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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एजेंटों के मायाजाल ने एक बार फिर से हजारों युवाओं की जिंदगी खतरे में डाल दी। अंग्रेजी न जानने वाले हजारों युवाओं को रशियन लैंग्वेज कोर्स करने के लिए यूक्रेन भेज दिया गया। उनका मकसद यूक्रेन पहुंचकर माफिया की मदद से आगे यूरोपियन देशों में पहुंचने का था। हजारों विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने आगे एजेंटों को पैसा अदा कर दिया था कि उनको यूरोप में बॉर्डर क्रास करवा दें।

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यूक्रेन से पोलैंड की दूरी 1100 किलोमीटर है और कार से 14 घंटे में आसानी से वहां पहुंचा जा सकता है। पंजाब के युवाओं का क्रेज यूरोप की ओर है पर यूरोप का शनैगन वीजा आसानी से नहीं मिलता है। इटली, फ्रांस के साथ कई यूरोपियन देश पंजाब के युवाओं को वीजा नहीं देते हैं। एजेंटों ने पंजाब के युवाओं को शनैगन देश पहुंचाने के लिए यूक्रेन का सहारा लिया।

पोलैंड यूरोपियन यानी शनैगन कंट्री के समूह का हिस्सा है। इसके आसपास जर्मनी, चेक गणराज्य, यूक्रेन, बेलारूस और रूस लगता है। पोलैंड में एंट्री होने के बाद आसानी से कोई भी इटली, फ्रांस और अन्य यूरोपियन देश में सड़क मार्ग या ट्रेन से जा सकता है, जिसके लिए वीजा की आवश्यकता नहीं होती है। एजेंटों ने यूक्रेन को अपना हब बना लिया है। पंजाब के हजारों युवाओं को दो से तीन लाख रुपये लेकर आठ माह के लैंग्वेज कोर्स के लिए यूक्रेन भेज दिया जाता है।
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कोरोना काल में तेजी से नेटवर्क ने काम किया। यूक्रेन में माफिया की मदद से हजारों युवाओं का ख्वाब पोलैंड में घुसना था। कई ऐसे विद्यार्थी हैं, जिन्होंने माफिया को अग्रिम पैसा तक दे रखा है कि उनको किसी तरह से 1100 किलोमीटर का सफर तय कर पोलैंड में एंट्री करवा दी जाए। ऐसे विद्यार्थी यूक्रेन से वापस आने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि उनको वापस आने पर दोबारा फीस देकर यूक्रेन जाना होगा। हालात यह है कि जो युवा रशियन लैंग्वेज कोर्स करने के लिए यूक्रेन गए हैं, उनमें से काफी को अंग्रेजी भी ढंग से बोलनी नहीं आती है। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब से यूक्रेन तक एक बड़ा माफिया काम करता है और आगे यूक्रेन से यूरोप तक दूसरा माफिया काम करता है।

20 हजार से अधिक ऐसे विद्यार्थी यूक्रेन में, इसमें एजेंटों का कोई कसूर नहीं

सुकांत एसोसिएशन ऑफ ओवरसीज कंसल्टेंट के सुकांत त्रिवेदी ने कहा कि 20 हजार से अधिक युवा यूक्रेन में हैं। वह किसी सूरत में वहां से नहीं लौटने वाला। यह युवा लैंग्वेज कोर्स करने के लिए तो गया है पर उनका मकसद आगे यूरोप पहुंचना है। इसमें एजेंटों का कोई कसूर नहीं है, युवा खुद दाखिला लेता है। आगे वहां जाकर वह पैसा देकर यूरोप चला जाए तो इसमें किसी का क्या कसूर? 

परिवार की जिंदगी बदलने का सपना लेकर जाते हैं युवा

यूरोप के किसी देश में नौकरी के मौके खोजने और अपनी और परिवार की जिंदगी बदलने का सपना देखकर ही युवाओं ने ट्रेवल एजेंट्स को 8 से 10 लाख रुपये दिए थे। इतना पैसा खर्च कर भी उनके साथ धोखा हुआ। यूक्रेन में बैठे ज्यादातर दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। रिटायर पुलिस अधिकारी आईजी एसके कालिया बताते हैं कि यह बहुत बड़ी इंडस्ट्री है। यह लोग गलती से मानव तस्करी करने वालों के चंगुल में फंस जाते हैं और उन्हें यूरोप भेजने के एवज में हजारों यूरो की कीमत चुकाते हैं। उन्हें अच्छी नौकरी दिए जाने का लालच दिया जाता है। पहले माल्टा की तरफ से यूरोप में दाखिला होता था, फिर यूक्रेन शुरू हो गया।

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