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बेअदबी कांड-पावन स्वरूप चोरी के आरोपी दोनों डेरा श्रद्धालुओं की अग्रिम जमानत खारिज

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अतिरिक्त जिला व सेशन जज हरबंस सिंह लेखी की अदालत ने बरगाड़ी बेअदबी कांड से संबंधित पावन स्वरूप चोरी की घटना में नामजद दो डेरा श्रद्धालुओं की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि इन दोनों आरोपियों गांव डग्गो रोमाना निवासी शक्ति सिंह व कोटकपूरा निवासी सुखजिंदर सिंह को पंजाब पुलिस की एसआईटी ने पांच अन्य डेरा श्रद्धालुओं के साथ ही चार जुलाई को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन इनके पास सीबीआई कोर्ट से जमानत होने की वजह से इन्हें रिहा करना पड़ा था। इस केस में एसआईटी ने आईपीसी की धारा 201, 414, 451 व 120बी की बढ़ोतरी की हुई है जिसके चलते इन दोनों ने जिला अदालत के पास बढ़ोतरी हुई धाराओं के तहत भी अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
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जानकारी के अनुसार साल 2015 में पेश आए बरगाड़ी बेअदबी कांड के घटनाक्रम में सबसे पहले 1 जून 2015 को गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन स्वरूप चोरी करने का मामला सामने आया था जिसके संबंध में थाना बाजाखाना में केस दर्ज हुआ था। साल 2018 के दौरान कुछ अन्य केसों की पड़ताल के दौरान पंजाब पुलिस की एसआईटी ने बरगाड़ी मामले की घटनाओं में डेरा सिरसा अनुयायियों का हाथ होने का खुलासा किया था। चूंकि इन मामलों की जांच सीबीआई के पास थी जिसके चलते एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने अपनी जांच में डेरा अनुयायियों को क्लीन चिट दी हुई है लेकिन कुछ दिन पहले एसआईटी ने बरगाड़ी कांड के मामलों की जांच शुरू करते हुए पावन स्वरूप चोरी मामले में 7 डेरा श्रद्धालुओं को गिरफ्तार किया था जिनमें से शक्ति सिंह व सुखजिंदर सिंह को सीबीआई कोर्ट से जमानत के कारण रिहा करना पड़ा जबकि बाकी पांच भी पुलिस व न्यायिक रिमांड पर रहने के बाद जमानत पर रिहा हो चुके है। केस में हुई धाराओं के बढ़ोतरी के चलते अब शक्ति सिंह व सुखजिंदर सिंह ने इसी केस में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सरकारी पक्ष ने दलीलें रखी कि एसआईटी की पड़ताल में सामने आया है कि इन दोनों आरोपियों ने ही घटना वाले दिन गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन स्वरूप चोरी किया था और अभी उक्त केस में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी होना भी बाकी है। ऐसे में इन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि बचाव पक्ष ने आरोपियों को सीबीआई से क्लीन चिट मिलने और केस की जांच को लेकर सीबीआई व एसआईटी के बीच तनातनी का हवाला दिया लेकिन अदालत ने सरकारी पक्ष की दलीलों पर सहमति जताते हुए दोनों की याचिका को खारिज कर दिया।
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