जालंधर कैंट विधानसभा क्षेत्र में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तैयारी तेज होने लगी है। लगातार तीन चुनाव जीत चुके कांग्रेस के परगट सिंह के सामने इस बार आम आदमी पार्टी और भाजपा मजबूत चुनौती पेश करने की तैयारी में हैं। कांग्रेस में परगट सिंह की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।
आप में राजविंदर कौर थियाड़ा के साथ डिप्टी मेयर मलकीयत सुभाना, काकू आहलूवालिया और मंगल सिंह बॉसी के नाम चर्चा में हैं। भाजपा में अमित तनेजा प्रमुख संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं। राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल, जगबीर सिंह बराड़ और सरबजीत सिंह मक्कड़ के नाम भी दावेदारों में हैं।कैंट में चुनावी मुद्दे भी स्थानीय समस्याओं के इर्द-गिर्द रहने की संभावना है। बिजली की ओवरलोडिंग, पुराने ट्रांसफार्मर, कूड़ा, बंद और पुराना सीवरेज, सड़कें, जलभराव, ग्रामीण विकास, नशाखोरी और कथित अवैध खनन बड़े मुद्दे बन सकते हैं।
2022 में कांग्रेस-आप के बीच सिर्फ 5,808 वोट का अंतर
- 2022 में कांग्रेस के परगट सिंह ने 40,816 वोट लेकर जीत दर्ज की थी। आप के सुरिंदर सिंह सोढ़ी को 35,008 वोट मिले। दोनों के बीच अंतर 5,808 वोट रहा।
- अकाली दल के जगबीर सिंह बराड़ को 27,387 और भाजपा के सरबजीत सिंह मक्कड़ को 15,946 वोट मिले। परगट सिंह को 32.63 फीसदी, सोढ़ी को 27.99 फीसदी, बराड़ को 21.89 फीसदी और मक्कड़ को 12.75 फीसदी वोट मिले। मतदान 64.48 फीसदी रहा।
- 2022 में कैंट में कुल 1,93,992 मतदाता थे। इनमें करीब 1,01,229 पुरुष और 92,758 महिलाएं थीं। पांच थर्ड जेंडर मतदाता भी दर्ज थे। पुरुष मतदाता महिलाओं से करीब 8,471 अधिक थे। हालांकि 2027 के लिए यह संख्या अंतिम नहीं है। विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया चल रही है।
- 2017 में परगट सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर 59,349 वोट लेकर अकाली दल के सरबजीत सिंह मक्कड़ को 29,124 वोट से हराया था। मक्कड़ को 30,225 और आप के हरकृष्ण सिंह वालिया को 25,912 वोट मिले थे। मतदान करीब 68.7 फीसदी रहा था। 2012 में परगट सिंह अकाली दल के टिकट पर जीते थे। इस तरह वह 2012 से लगातार कैंट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
- परगट सिंह अपने कार्यकाल में सड़क और आधारभूत ढांचे के कार्यों को उपलब्धि बताते हैं। उनके अनुसार परिधरी रोड की योजना तैयार कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। 66 फुट रोड और मैकडॉनल्ड से कैंट को जोड़ने वाली सड़क को भी वह प्रमुख कार्यों में गिनाते हैं। उनका कहना है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई कर लोगों को भविष्य की परेशानी से बचाने का प्रयास किया गया। विधायक का आरोप है कि मौजूदा सरकार से विकास कार्यों के लिए अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
बिजली से लेकर सीवरेज तक स्थानीय समस्याएं
कैंट के बालपक्ता और तिलक नगर-ईश्वरपुरी जैसे इलाकों में बढ़ती आबादी के बावजूद छोटे क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों से काम चलने की शिकायत है। गर्मियों में ओवरलोडिंग और बार-बार बिजली बंद होने से लोगों को परेशानी होती है। नए और अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाने की मांग उठ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पुराना सीवरेज सिस्टम भी परेशानी का कारण है। लोगों के अनुसार लाइनें अक्सर बंद हो जाती हैं जिससे गंदे पानी की निकासी प्रभावित होती है और जलभराव होता है। कूड़ा उठाने, घर-घर से कूड़ा एकत्र करने और उसके स्थायी निपटारे की व्यवस्था को लेकर भी सवाल हैं। सड़क और जलभराव के साथ नगर निगम में शामिल गांवों को शहरी सुविधाओं के अनुरूप विकास देना भी अहम मुद्दा रहेगा।
परगट सिंह ग्रामीण क्षेत्रों में कथित अवैध खनन और बड़े पैमाने पर मिट्टी उठाने का मुद्दा भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे जमीन के स्तर में बदलाव और कुछ स्थानों पर जमीन धंसने जैसी स्थिति बनी है। वह सरकार से ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की मांग कर रहे हैं।
टिकट की दौड़ में कई चेहरे
कांग्रेस में परगट सिंह सबसे मजबूत दावेदार हैं। आप में राजविंदर कौर थियाड़ा के अलावा मलकीयत सुभाना, काकू आहलूवालिया और मंगल सिंह बॉसी के नाम चर्चा में हैं। भाजपा में अमित तनेजा का नाम प्रमुख है। अशोक मित्तल, जगबीर सिंह बराड़ और सरबजीत सिंह मक्कड़ भी दावेदारों में हैं। फिलहाल किसी दल ने अंतिम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।
बदलते समीकरणों पर टिका चुनावी गणित
इस बार जगबीर सिंह बराड़ के भाजपा में सक्रिय होने से पार्टी को उनका पुराना कैंट आधार मिलने की उम्मीद है। अमित तनेजा भी जालंधर वेस्ट छोड़कर कैंट में सक्रिय हो गए हैं और यहां कार्यालय बनाकर रणनीति तैयार कर रहे हैं। आप की राजविंदर कौर थियाड़ा भी लगातार सक्रिय हैं। अकाली दल के हरदीप संघा भी क्षेत्र में भागदौड़ कर रहे हैं।
- 2022 के आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस और आप के बीच मुख्य मुकाबला था लेकिन अकाली दल और भाजपा का वोट आधार भी मजबूत था। यदि भाजपा मजबूत उम्मीदवार उतारती है और आप अपना संगठन मजबूत रखती है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।