पंजाब में विधानसभा चुनाव में मजबूत पार्टी बनकर उभर रही आम आदमी पार्टी स्थानीय मुद्दों को लेकर पूरी तरह से बैकफुट पर जाने लगी है। केजरीवाल की मजीठिया से लिखित माफी हो या बादल परिवार की इंडो कैनेडियन बसों पर केजरीवाल सरकार की दया दृष्टि, पंजाब के चुनावों में अहम मुद्दा बनती जा रही है।
टूरिस्ट परमिट पर चलने वाली बादल परिवार की इंडो कैनेडियन बसों को नियमानुसार स्टेज कैरियर परमिट लेना अनिवार्य है लेकिन इंडो कैनेडियन बसें आराम से दिल्ली एयरपोर्ट तक जा रही हैं जबकि पंजाब सरकार की वोल्वो बसों को दिल्ली का बस अड्डा क्रास नहीं करने दिया जा रहा है। केजरीवाल सरकार ने पंजाब सरकार की वोल्वो बसों का पहिया जाम कर दिया लेकिन इंडो कैनेडियन को खुलेआम छूट दे रखी है। दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग ने पंजाब की सरकारी बसों को नवंबर 2018 में दिल्ली एयरपोर्ट पर जाने से रोक दिया।
केजरीवाल पहले भी एसवाईएल नहर के मुद्दे पर विरोधी दलों के निशाने पर रहे हैं। एक बार उन्होंने पंजाब के हक में बयान दिया था तो हरियाणा ने भौंहे तानते हुए उन्हें याद दिलाया था कि दिल्ली को पानी हरियाणा से मिलता है। इसके बाद केजरीवाल ने यू-टर्न भी मारा था लेकिन, अब पंजाब के चुनावी दिनों में एसवाईएल नहर पर उनके स्टैंड से जुड़ा सवाल केजरीवाल का पीछा करता हुआ नजर आ रहा है। विधायक सुशील रिंकू का कहना है कि केजरीवाल पंजाब के साथ धोखा करते हैं। जब वह शंभू बैरियर क्रास करते हैं उनका रंग बदल जाता है। हरियाणा व दिल्ली पहुंचते ही पंजाब विरोधी बातें करना शुरू कर देते हैं। एसवआईएल का मुद्दा पंजाब का सबसे अहम मामला है और केजरीवाल दिल्ली व हरियाणा में जाकर पंजाब विरोधी बात करने लगते हैं।
चंडीगढ़ पंजाब का ही होना चाहिए क्योंकि जब पंजाब व हरियाणा अलग अलग राज्य बने थे तो देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि कुछ समय के लिए चंडीगढ़ साझा राजधानी रहेगी और बाद में पंजाब को मिल जाएगी। फिर 1985 में राजीव-लौंगोवाल समझौते के तहत चंडीगढ़ को पंजाब के सुपुर्द किए जाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन 26 जनवरी 1986 को राजीव गांधी सरकार ने ऐन वक्त पर हाथ खींच लिए और चंडीगढ़ के पंजाब के पास जाने की पूरी कवायद धरी रह गई। आज भी पंजाब चंडीगढ़ पर अपना पूरा हक जताता है। पंजाब की यह मांग हर बार चुनाव में जोर शोर से उठती है। इस बार भी यह मांग जोर पकड़ने लगी है।
ऐसी चर्चा भी शुरू हो चुकी है कि चंडीगढ़ पंजाब को दिया जा सकता है और केंद्र सरकार फैसला ले सकती है। इस बीच अरविंद केजरीवाल ने इसको कोरी अफवाह बता दिया। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश प्रधान मोना जयसवाल का कहना है कि चंडीगढ़ पंजाब का है और रहेगा। बाकी रही आम आदमी पार्टी की बात, उनका अपना घर इसलिए बिखर रहा है क्योंकि वह पंजाब विरोधी बातें करते हैं। पंजाब में बात यहां के स्थानीय मुद्दों की करते हैं लेकिन दिल्ली में जाते ही पंजाब को दुश्मन मानने लगते हैं।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अमृतसर की अदालत में पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम मजीठिया पर नशा कारोबार को लेकर लगाए आरोपों के संबंध में माफीनामा देकर पंजाब की सियासत में भूचाल ला दिया था। इसके बाद उनकी पार्टी में बगावती सुर उठने लगे थे। आप विधायक व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा और विधायक कंवर संधू ने इसे गलत बताते हुए विरोध जताया। वहीं भगवंत मान ने इस्तीफा तक दे दिया था। अब यह जिन्न बोतल से फिर बाहर आ गया है। पुलिस ने मजीठिया पर तस्करी का केस दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही केजरीवाल का माफीनामा भी वायरल हो गया है। कांग्रेस इसको चुनावी प्रचार में खूब भूना रही है। भाजपा के पूर्व प्रधान मनोरंजन कालिया का कहना है कि केजरीवाल गिररिट से भी ज्यादा तेज रंग बदलते हैं।
पंजाब की आप की महिला इकाई की प्रधान राजविंदर कौर थियाड़ा का कहना है कि हर सूबे के अपने मुद्दे होते हैं और उन मुद्दों पर चुनाव होता है। पंजाब की रिवायती पार्टियों को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है, जिस कारण वह घबरा रही हैं। केजरीवाल अगर पंजाब की पराली को लेकर बात करते हैं तो पंजाब के वातावरण को शुद्ध करने की बात करते हैं। पराली से इथनाल बनाने की बात करते हैं तो राजनीति शुरू हो जाती है। आम आदमी पार्टी पंजाब में डटकर यहां के मुद्दों पर खड़ी हैं।