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पीड़ितों को न्याय दिलाने एससी जाएगी केएमओ

Mon, 15 Jul 2013 05:32 AM IST
Jalandhar
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जालंधर। पंजाब में आतंकवाद के समय निशाना बने बेकसूर युवाओं की लड़ाई संस्था खालसा मिशन ऑर्गेनाइजेशन (केएमओ)और पंजाब ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन (पीएचआरओ) लड़ रही हैं। ये संस्थाएं फर्जी एनकाउंटर में मारे गए युवाओं को इंसाफ दिलाने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही हैं।
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प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडवोकेट अमर सिंह चाहल ने कहा कि सब इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह ने आतंकवाद के समय बेकसूर युवाओं का एनकाउंटर करने की बात कबूल कर ली है। इसके बाद साफ हो गया है कि उस समय पुलिस ने बेकसूर परिवारों को निशाना बनाया था। एक पूर्व पुलिस अधिकारी द्वारा एनकाउंटर की बात कबूलने के बाद कोर्ट को खुद ही इस मामले को संज्ञान में लेना चाहिए था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस संबंध में उनके द्वारा दाखिल की गई रिट को खारिज कर दिया है। एडवोकेट चाहल ने कहा कि अब दोनों संस्थाएं सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाएंगे। यही नहीं यह संस्थाएं आतंकवाद के पीड़ित परिवारों को भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहेंगी। रविवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में खालसा मिशन ऑर्गेनाइजेशन और पंजाब ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन के साथ ऐसे परिवारों के सदस्य भी मौजूद थे, जिनके बेटे, पति या परिवार के अन्य सदस्य पुलिस की गोली का शिकार हुए थे। परिवार के सदस्यों ने इस दौरान आपबीती भी बताई। संस्था के कृपाल सिंह, गुरबचन सिंह, अमरजीत सिंह चाहल और एडवोकेट जगदीप सिंह रंधावा ने कहा कि इन मामलों की सीबीआई जांच भी होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को सब इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह के ब्यान के बाद इस मामले की गहन जांच के भी निर्देश देने चाहिए। उन्होंने पंजाब सरकार से पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद देने की भी अपील की है।

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पांच वर्ष के बच्चे भेज दिए थे जेल
तरनतारन निवासी चमन लाल पुत्र गोपीराम ने कहा कि आतंकवाद के समय उन्हें बेकसूर होते हुए भी जेल जाना पड़ा था, तो उनके बेटे गुलशन कुमार को पुलिस ने फर्जी एनकाऊंटर में मार दिया था। उन्होंने बताया कि उनके परिवार को जब डीएसपी दिलबाग सिंह की टीम ने घर से उठाया था, तो अन्य सदस्यों के साथ पांच वर्ष के दो बच्चों को भी जेल में बंद कर दिया गया था।
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अमृतधारी होने के कारण मार दी गोली
तरनतारन के ही काबुल सिंह पुुत्र पाल सिंह ने बताया कि वर्ष 1990 में पुलिस ने उनके भाई अवतार सिंह को इस कारण गोली मार दी थी, क्योंकि वह अमृतधारी था। इसके बाद उनके बेटे रविन्दर सिंह को पुलिस घर से उठा ले गई और फर्जी एनकाउंटर में मार दिया था। यह फर्जी एनकाउंटर 30 मई 1991 को जोधपुर के बागों में किया गया था।
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