जालंधर। जालंधर देहात की सीआईए स्टाफ की पुलिस ने जालसाजी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दो सदस्यों को काबू किया है। यह गिरोह असली करेंसी के स्थान पर दोगुणा नकली करेंसी देने का झांसा देकर लोगों से रुपये हड़प लेता था। अटैची में नोटों को इस तरह से सजाते थे कि ऐसा मालूम पड़ता था कि नकली नोटों की अटैची भरी हुई है। हरेक गड्डी के ऊपर नीचे असली नोट होते थे जबकि बीच में सफेद कागजातों को नोटों के साइज का काटकर रखा हुआ था।
एसपी राजिंदर सिंह ने बताया कि सीआईए स्टाफ की पुलिस को बलविंदर पाल निवासी आदमपुर ने शिकायत की थी कि उसको नकली करेंसी दोगुणा देने का वादा कर ठगी कर ली गई। इसके बाद मामले को दर्ज कर पुलिस जांच कर रही थी कि गुप्त सूचना मिलने पर टीम बनाकर छापामारी की गई। पुलिस ने लुधियाना के जोधेवाल निवासी संध्या गायत्री और बिहार के बेतिया निवासी अजय मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। अजय मिश्रा के पास से 200 ग्राम हेरोइन बरामद हुई जबकि एक अटैची भी मिला, जिसमें 50 के नोटों की गड्डियां थीं।
ऐसे चलता था ठगी का धंधा
इंस्पेक्टर अंग्रेज सिंह ने बताया कि पहले गिरोह के सदस्य किसी लालची व्यक्ति को अपने जाल में फांसते थे। कुछ नोट देते थे, जिनको लालची व्यक्ति बाजार में चलाकर तसल्ली कर लेता था कि नोट असली जैसे चलते हैं। इसके बाद जालसाज झांसा देते थे कि जितनी राशि वह देगा, उसके बदले नकली करेंसी दोगुणा दी जाएगी। जैसे ही डीलिंग होती तो असली नोट लेकर तैयार अटैची थमा दिया जाता और मौके पर गिनती न करने के लिए बोलकर जल्दी से निकल जाते। रास्ते में गिरोह के सदस्य नकली करेंसी वाला अटैची भी छीन लेते थे।
लुटने के बाद संध्या बन गई थी गिरोह की सदस्य
लुधियाना की संध्या गायत्री गिरोह का खुद शिकार बन चुकी थी। वह इस गिरोह के संपर्क में आई और दिल्ली में तीन लाख रुपये असली देकर छह लाख का अटैची ले लिया, जिसे बाद में छीन लिया गया। संध्या डरकर पुलिस स्टेशन तक भी नहीं गई। उसने अपना पैसा पूरा करने के लिए गिरोह के सदस्यों का ही सहारा लिया और कहा कि वह एक शिकार को फंसा लेगी तो उसका पैसा उसको वापस कर दिया जाए। संध्या आदमपुर के रहने वाले बलविंदरपाल सिंह को जानती थी, जिसको शिकार बना लिया।