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चुनाव नतीजों के बाद नाम होगा तय!

Wed, 19 Dec 2012 05:31 AM IST
Jalandhar
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जालंधर। पंजाब भाजपा का अध्यक्ष कौन होगा? इसको लेकर संशय बरकरार है और पंजाब प्रधानगी का चयन अब गुजरात व हिमाचल के चुनाव नतीजों के बाद ही होगा। वहीं पंजाब में दो बड़े गुटों में प्रधानगी को लेकर खींचतान की चलते हाईकमान आम सहमति बनाने के लिए जुटा हुआ है। ऐसे में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है, जो भाजपा के खाते की तीनों लोकसभा सीटों को फोकस कर होगी। जिसको लेकर पार्टी में मंथन चल रहा है।
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पंजाब में पिछली बार प्रधानगी को लेकर दिल्ली दरबार तक मामला पहुंच गया था। उस समय मनोरंजन कालिया का गुट काफी हावी था और उन्होंने प्रदेश के तत्कालीन महासचिव अश्वनी शर्मा को कुर्सी पर बैठा दिया। दौड़ में दूसरे नंबर पर रहे कमल शर्मा प्रधानगी की कुर्सी के निकट पहुंचकर वापस आ गए।
अब समय बदला हुआ है। पठानकोट से विधायक व मौजूदा प्रधान अश्वनी शर्मा कुर्सी पर बैठे रहना चाहते हैं, लेकिन कमल शर्मा प्रधानगी के लिए फिर से दौड़ में है। अश्वनी शर्मा व कमल शर्मा में कौन प्रधान बनेगा, इसको लेकर संघ व भाजपा में चर्चा पूरी तरह से गर्म है।
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सूत्रों के मुताबिक आरएसएस का लगाव कमल शर्मा के प्रति है, जो इस समय सीएम के मुख्य सलाहकार हैं। कमल शर्मा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से निकलकर आए हैं और मध्य प्रदेश में भी सीएम के मुख्य सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं। कमल शर्मा सीएम के सलाहकार की कुर्सी को छोड़कर भाजपा अध्यक्ष बनने के इच्छुक हैं लेकिन इस बार भी अश्वनी शर्मा आड़े आ रहे हैं। इस कारण अब हाईकमान बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि बीच का रास्ता होशियारपुर, गुरदासपुर की लोकसभा सीट पर फोकस कर निकाला जा रहा है। पिछली बार भाजपा ने अमृतसर की लोकसभा सीट जीत ली थी जबकि होशियारपुर व गुरदासपुर दोनों सीट हार गई थी। बीच के रास्ते में भाजपा हाईकमान इन क्षेत्रों से किसी नेता को आगे ला सकती है, लेकिन उसका फायदा लोकसभा चुनावों में मिल जाए। होशियारपुर के राज्यसभा सदस्य अविनाश राय खन्ना पंजाब के प्रधान रह चुके हैं वहीं उसी क्षेत्र के तीक्षण सूद के नाम पर भी विचार किया जा रहा है। बेशक होशियारपुर सीट आरक्षित है लेकिन हाईकमान इस इलाके से नेता को आगे लाकर इस सीट पर कब्जा करने पर भी विचार कर रहा है। गुरदासपुर में भाजपा के पास कोई बड़ा दिग्गज नहीं है, वहां से दो बार विनोद खन्ना चुनाव जीत चुके हैं, वह पिछली बार हार गए थे। वह स्टार हैं, इसलिए प्रधानगी की दौड़ में उनका नाम नहीं आ रहा है।
बहरहाल, गेंद अब दिल्ली हाईकमान के पाले में है। आम सहमति बनती न देखकर भाजपा के महासचिव जगत प्रकाश नड्डा अब सारी रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली निकल गए हैं, जिस पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शांता कुमार व प्रधान नितिन गडकरी से विचार होगा। दिल्ली से आए संदेश पर ही प्रधानगी की कुर्सी का फैसला हो पाएगा।
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