नूरमहल। दिव्य शांति महोत्सव के दूसरे दिन पहले दिन की अपेक्षा श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रही। श्रद्धालुओं ने महाराज के सामने प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं को रखा। इन प्रश्नों का समाधान आशुतोष महाराज ने अध्यात्मिक सूत्रों से दिया व समाज निर्माण में आवश्यक अध्यात्मिक जाग्रति एवं निस्वार्थ सेवा पर बल दिया। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के प्रवक्ता स्वामी विश्वा देवानंद के मुताबिक नूरमहल के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में आशुतोष महाराज के लगभग 45 लाख शिष्य इन दो दिनों में शिरकत कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि मानव का शत्रु उसके भीतर ही शत्रुता, बर्बरता, दंभ, असहिष्णुता व महत्वाकांक्षा हैं। इन्हीं के कारण के वह अपने आप तो अशांत, दुखी व परेशान है ही अपने कर्मों से समाज के भीतर भी अशांति को फैला रहा है। इसलिए आज भी एक युद्ध की आवश्यकता है जो भीतर लड़ा जाए जो आंतरिक अवगुणों को समाप्त कर सके। और यह युद्ध मानव को स्वयं ही लड़ना होगा तभी वह विश्व शांति के लिए तैयार हो पाएगा।
संस्थान के द्वारा देश भर में चलाए जा रहे दस विभिन्न सामाजिक विषयी व्यापक कार्यक्रमों पर पंडाल में एक विशाल प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें संस्थान के शिक्षा, स्वास्थ्य, नशा मुक्ति, युवा विकास, महिला सशक्तीकरण, विकलांगों के विकास एवं रोजगार, बंदी सुधार एवं पुनर्वास, आपदा राहत, गो एवं पर्यावरण संरक्षण की प्रभावशाली झलकियां मिलीं। प्रदर्शनी के साथ-साथ संस्थान के कार्यक्रमों के अंतर्गत नेत्रहीनता और कैदियों द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों को लोगों ने अत्यधिक सराहा। वृद्धों और विकलांगों के लिए मुख्य द्वार से सभा स्थल तक ले जाने के लिए वाहनों का प्रबंध किया गया था।