मंत्री जी, ...मैं आरसीएफ के क्वार्टर में रहने वाला किराएदार हूं
- आरसीएफ के क्वार्टर में रहने वाले किराएदार से एडवांस किराया मांगा तो सामान समेत सड़क पर आकर खोली पोल
- जिस कर्मी के नाम पर अलॉट है आवास, उसे किराए देकर वहां रहता था सुरजीत
महेश कुमार
कपूरथला।
मंत्री जी, ...मैं आरसीएफ के क्वार्टर में रहने वाला किराएदार हूं। सीएमई दफ्तर में ऑफिस खलासी के तौर पर कार्यरत होने के बावजूद मुझे रेल कोच फैक्टरी (आरसीएफ) का क्वार्टर अलाट नहीं है। ऐसे में जिस कर्मी के नाम पर आवास अलाट है, उसने मुझे अपना आवास किराए पर दे रखा था। अब वह मुझसे तीन महीने का किराया एडवांस मांग रहा है। ऐसे में मेरे साथ न्याय होना चाहिए। रेलमंत्री से यह शिकायत की है आरसीएफ कर्मी सुरजीत कुमार ने। मंगलवार को सुरजीत अपने किराए के क्वार्टर से यह कहते हुए सामान समेत सड़क पर आ गया कि वह एडवांस किराया देने में असमर्थ है। उसे भी क्वार्टर अलाट होना चाहिए, क्योंकि पूरी प्रक्रिया के तहत आवेदन के वर्षों बाद भी उसे क्वार्टर नहीं मिला है।
मंगलवार को सुरजीत कुमार जब रेल कोच फैक्टरी (आरसीएफ) के एडमिन ब्लाक के सामने खुले आसमान के सामान समेत बैठा था तो वहां भीड़ जुट गई। उसने बताया कि सुबह के समय सामान रखकर कर्मचारी चीफ मैकेनिकल इंजीनियर (सीएमई) के कार्यालय में ड्यूटी पर चला गया, लेकिन शाम को पांच बजे छुट्टी के बाद तो इस कर्मी के आसपास रेल कर्मी इकट्ठे हो गए।
आरसीएफ कर्मी सुरजीत कुमार ने बताया कि वह पिछले छह साल से वह आरसीएफ में रह रहा है, लेकिन अभी तक उसे सरकारी क्वार्टर अलाट नहीं हुआ है। आरोप लगाया कि वह आरसीएफ के टाइप-1 के उस क्वार्टर में रह रहा था, जोकि एक अन्य आरसीएफ कर्मी के नाम पर अलाट है, लेकिन उसने यह क्वार्टर सुरजीत को 4500 रुपये मासिक की दर से किराये पर दे रखा था। सुरजीत हर माह उसे एडवांस किराया दे देता था, लेकिन अब उसने तीन-चार माह का एडवांस किराया मांगा है। इसी वजह से परेशान सुरजीत ने मंगलवार को अपना पूरा सामान बाहर निकालकर उसे एडमिन ब्लाक के बाहर रख दिया। आरोप लगाया कि आरसीएफ में जिन कर्मियों को क्वार्टर अलाट हैं, वह आरसीएफ के बाहर निजी घरों में शिफ्ट हो चुके हैं, फिर भी सरकारी क्वार्टर खाली नहीं कर रहे हैं। जबकि अवैध रूप से इन क्वार्टरों में किराएदार रखकर वसूली की जा रही है। उसने कहा कि अगर उन लोगों ने अपने घर बना लिए हैं, तो आरसीएफ प्रशासन उनसे क्वार्टर खाली करवा इसे जरूरतमंदों को अलाट क्यों नहीं कर रहा है। निश्चित रूप से इसमें प्रशासन की मिलीभगत है। सुरजीत कुमार ने बताया कि देर शाम करीब सात बजे आरसीएफ के साथी कर्मियों के कहने पर उन्होंने अपना सामान उठा लिया है, क्योंकि सर्दी में खुले आसमान के नीचे सोना ठीक नहीं हैं। इसलिए साथी कर्मियों की बात मानते हुए एक साथी के घर पर रात गुजारने का फैसला लिया है। बुधवार की सुबह इस मामले में आरसीएफ प्रशासन के समक्ष रखेंगे।
रेल मंत्री को ट्वीट के जरिये कराया अवगत
सुरजीत ने बताया कि उसका भाई भी साल 1993 से आरसीएफ में कार्यरत हैं, लेकिन 24 साल बाद भी उस क्वार्टर अलाट नहीं हुआ है। वेेेटिंग के नाम पर प्रशासन क्वार्टर अलाट करने से पल्ला झाड़ लेता है और जिन लोगों को अलाट हुए हैं, वह खाली न करके ऐसे अवैध वसूली कर रहे हैं। उसने बताया कि आरसीएफ में क्वार्टर अलाटमेंट में भ्रष्टाचार में शामिल पूरी चेन की सूचना ट्वीट के जरिये रेल मंत्री पियूष गोयल को दे दी है।
वरिष्ठता के आधार पर अलाट होगा क्वार्टर, जांच करवाएंगे : सीएमई
आरसीएफ हाउपसिंग कमेटी के चेयरमैन और सीएमई पीसी गुप्ता ने कहा कि क्वार्टर वरिष्ठता के हिसाब से ही अलाट होगा। अभी वेटिंग चल रही है। एडमिन ब्लाक के सामने एक कर्मी की ओर खुले आसमान के नीचे अपना सामान रखने के मामले पर बोले कि वह इसका पता करते हैं। आरसीएफ कर्मियों की ओर से अपना क्वार्टर दूसरे कर्मी को रेंट पर देने के मामले से उन्होंने अनभिज्ञता जताई। वे इसकी जांच कराएंगे।