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धान खरीद: निजी ट्रेडर्स ने मनमाने दामों पर 13 दिन खूब कूटी चांदी

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13 दिन निजी ट्रेडर्स ने मनमाने रेट पर लिया धान, हुए मालामाल
एक अक्तूबर के बजाय 22 सितंबर से ही खरीदा जाने लगा था धान
मार्केट कमेटी की छत्रछाया शैलर मालिकों ने मंडियों में खरीदा धान
मामला गर्माया तो मार्केट कमेटी ने दिखाए तेवर, मंडी से व्यापारी गायब
बिना मार्केट फीस और एमएसपी से कम दाम पर बिका धान
महेश कुमार
कपूरथला। अभी शैलरों में दूसरे सूबों का पीडीएस वाले चावल की बरामदगी का मामला चर्चा में हैं। वहीं कपूरथला मार्केट कमेटी में निजी ट्रेडर्स ने 22 सितंबर से अब तक मनमाने दाम पर धान खरीद कर खूब चांदी कूटी। मार्केट और आरडीएफ फीस के बिना ही निजी ट्रेडर्स मंडी में दनदनाते रहे और किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने वाली मार्केट कमेटी आंखें मूंदें बैठी रही। जब मामला गर्माया तो शुक्रवार को मंडी से निजी ट्रेडर्स गायब हो गए। वहीं जांच के नाम पर प्रशासन का रवैया हीलाहवाली वाला रहा।
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कपूरथला में कुल 42 मंडियां हैं। मार्केट कमेटी कपूरथला के अधीन 11 मंडियों में से महज दो कपूरथला व फत्तूढींगा में धान की आमद और बिक्री का दौर शुरू हुआ है। खरीद एक अक्तूबर से होनी थी, लेकिन कपूरथला की मंडी में तो 22-23 सितंबर से ही धान आना शुरू हो गया, लेकिन सरकारी खरीद और अलाटमेंट न होने के कारण मार्केट कमेटी ने निजी ट्रेडर्स से हाथ मिलाकर मनमाने दामों पर धान खरीदा। जबकि धान का एमएसपी 1770 रुपये हैं। मंडी से जुड़े सूत्रों की मानें तो निजी ट्रेडर्स ने 1445 से 1650 तक प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीदा। इसमें मार्केट कमेटी ने धान की खरीद पर प्रति 100 रुपये की रकम पर तीन प्रतिशत मार्केट कमेटी सरकारी फीस और तीन प्रतिशत रूरल डेवलेपमेंट फंड (आरडीएफ) भी नहीं वसूला। जिसे नजरंदाज कर निजी ट्रेडर्स को डबल फायदा पहुंचाया गया। सरकारी खरीद से पहले मार्केट कमेटी की छत्रछाया में राइस शैलर के मालिक मंडियों में आढ़तियों के माध्यम से धान की खरीद कर गए। जबकि सरकारी खरीद शुरू होने के बाद भी यह दौर अंदरखाते चलता रहा। जिसमें किसानों को धान के गीले होने का तर्क देकर मनमाफिक दाम लगाकर खरीद की गई। अब मामला मीडिया में उछलने के बाद शुक्रवार को मंडियों से निजी ट्रेडर्स गायब रहे। वहीं मार्केट कमेटी को भी मजबूरन सख्त रवैया अपनाना पड़ा। अब सवाल यह उठता है कि अगर मार्केट कमेटी सही ढंग से खरीद करवा रहा था तो निजी ट्रेडर्स अब गायब क्यों हुए। वहीं सितंबर माह में धान की खरीद पर वसूले गई मार्केट कमेटी की फीस का ब्यौरा एक माह बीतने के बाद भी मीडिया के समक्ष उजारग क्यों नहीं किया जा रहा है और न ही खरीद का विवरण देने से कन्नी काट रहे हैं। मार्केट कमेटी के सचिव अरविंदर सिंह साही व मंडी सुपरवाइजर प्रिथीपाल सिंह घुम्मण ने बताया कि एक अक्तूबर को सरकारी बोली निर्धारित की गई थी, उससे पूर्व जो भी धान मंडी में निजी एजेंसी की ओर से ही खरीदा जाता है, उसका रिकार्ड तैयार किया गया है और किसी भी प्रकार की भी फीस चोरी नहीं होने दी जाएगी। निजी खरीदारों की ओर से एक सप्ताह में फीस अदा करनी होती है। एसडीएम-कम-प्रशासक मार्केट कमेटी डा. नयन भुल्लर ने कहा कि उनके हिसाब से रिकार्ड सही है। कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। प्रशासन के बयान से साफ है कि जांच के नाम पर हीलाहवाली वाला रवैया अपनाया गया है।
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