कपूरथला। रेल कोच फैक्टरी (आरसीएफ) के निगमीकरण/निजीकरण के विरोध में कारखाने में चल रहा आंदोलन अपने अगले पड़ाव में प्रवेश कर गया। आरसीएफ के रामलीला मैदान में ऐतिहासिक रैली का आयोजन किया गया। आरसीएफ बचाओ संघर्ष कमेटी के आह्वान पर समस्त रेडिका कर्मचारियों और उनके परिवारों की ओर से बड़ी संख्या में हिस्सा लिया गया। आरसीएफ की सड़कें भरी हुई थीं और सभी ओर से बड़ी संख्या में सभी आयु की महिलाएं, पुरुष, बच्चे रैली के आयोजन स्थल पर जल्द से जल्द पहुंचने की कोशिश में थे।
टाउनशिप के बाहर रह रहे कर्मचारी भी अपने परिवारों समेत रामलीला मैदान में पहुंच रहे थे। रोष सभा में पहुंचने वाले सभी जानते थे कि इस बार की लड़ाई आर या पार की है। इस बार चूक गए तो फिर संभलने का दोबारा मौका नहीं मिलेगा। सबके सामने एक ही लक्ष्य था कि कैसे भी हो दिल्ली में बैठी सरकार को आक्रोश दिखाना है। रेलवे की उत्पादन इकाइयों का निगमीकरण या निजीकरण नहीं होने देंगे। आरसीएफ बचाओ संघर्ष कमेटी के सचिव सर्वजीत सिंह ने अपने जोशीले अंदाज में सभी के अंदर नए जोश और उर्जा का संचार किया। आरसीएफ वासियों ने निगमीकरण के रद्द होने तक आंदोलन जारी रखने का प्रण लिया। विशाल जनसमूह ने आरसीएफ बचाओ संघर्ष कमेटी को अपने पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया। आरसीएफ बचाओ संघर्ष कमेटी के संयोजक जसवंत सैनी ने रैली में आए सभी कर्मचारियों और उनके परिवारों का धन्यवाद किया। उन्होंने सभी से इस घड़ी में संघर्ष के अगले पड़ाव के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
हजारों की संख्या में आए समूह ने बाद में एक विशाल रैली का रूप ले लिया और आरसीएफ परिसर के प्रमुख इलाकों से मार्च पास्ट किया। इस सभा के संचालन में परमजीत सिंह खालसा, राजबीर शर्मा, सहायक संयोजक राम रतन सिंह, मंजीतसिंह बाजवा, तालिब मुहम्मद, दर्शन लाल की प्रमुख भूमिका रही। मौके पर राजिंदर सिंह, हरी दत्त, राजेश ठाकुर, वीर प्रकाश, उमाशंकर, जयपाल सिंह, मयंक भटनागर, बलदेवराज, जगदीश सिंह, रमन जैन, दलजीत सिंह बाजवा, रंजीत सिंह, जीत सिंह, सुखबीर सिंह मौजूद थे।