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निजीकरण के विरोध को लेकर कर्मचारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर

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कपूरथला। रेडिका (रेड डिब्बा कारखाना) की सभी यूनियनों एवं एसोसिएशन ने आरसीएफ बचाओ संघर्ष कमेटी के झंडे तले हजारों कर्मचारियों की हाजिरी में रेल कोच फैक्ट्री के गलियारे में एकजुट होकर रेल मंत्रालय के हिटलरशाही फरमान के विरोध में ‘‘करो या मरो’’ के इरादे के साथ जोरदार रोष प्रदर्शन किया। मंगलवार के रोष प्रदर्शन में रेडिका के कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
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रोष प्रदर्शन में आरसीएफ बचाओ संघर्ष कमेटी के कनवीनर जसवंत सिंह सैनी ने कर्मचारियों को एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया और निगमीकरण के दुष्प्रभाव से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि जब रेडिका टारगेट से अधिक एवं समय से कोचों का उत्पादन पूर्ण कर रहा है तो इसका निजीकरण करने का क्या औचित्य है। उन्होंने अगले संघर्ष के बारे में सभी कर्मचारियों को अवगत करवाया और सभी को उनमें शामिल होकर संघर्ष को और तेज करने की अपील की। कमेटी के सेक्रेटरी सर्वजीत सिंह ने रेल मंत्रालय को चेतावनी देते हुए कहा की पूरी भारतीय रेलवे के सातों प्रोडक्शन यूनिटों के कर्मचारियों के साथ- साथ पूरी भारतीय रेलवे के कर्मचारियों में रोष की ज्वाला प्रचंड है। रेलवे के शांतिमय माहौल के लिए निगमीकरण/ निजीकरण के आदेश को शीघ्र ही रद्द किया जाए। इस मौके पर कमेटी के को-कनवीनर राम रतन सिंह, मंजीत सिंह बाजवा, परमजीत सिंह खालसा, राजबीर सिंह, हरी दत्त, दर्शन लाल, राजेश ठाकुर, वीर प्रकाश, जीत सिंह, राजेश ठाकुर, जयपाल सिंह, मयंक भटनागर, रमन कुमार मौजूद थे।
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