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राज्य भर के निजी स्कूलों की जांच के लिए शिक्षा विभाग की टीमें गठित

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निजी स्कूलों की जांच के लिए शिक्षा विभाग की टीमें गठित
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चुनिंदा दुकानों से किताबें और वर्दी खरीदने को मजबूर करने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदकोट। शिक्षा विभाग ने राज्य भर के कई जिलों से मिल रही शिकायतों के बाद निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को चुनिंदा दुकानों से किताबें और वर्दी खरीदने के लिए मजबूर करने के मामलों की जांच के लिए टीमें गठित कर दी है। यह टीमें अगले एक सप्ताह के दौरान राज्य भर के तमाम मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की जांच करेंगी। इसके बाद अपनी रिपोर्ट शिक्षा विभाग के डायरेक्टर को सौंपेगी। टीमों द्वारा स्कूलों की जांच के दौरान जानकारी जुटाई जाएगी कि क्या स्कूल ने इस साल अपनी वर्दी का रंग बदल दिया है। विद्यार्थियों को किसी खास दुकान से वर्दी व किताबें खरीदने के लिए मजबूर तो नहीं किया जा रहा।
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शिक्षा विभाग पंजाब की ओर से सभी जिलों में ऐसी टीमों का गठन किया जा चुका है। विभाग के पास शिकायतें पहुंच रही है कि निजी स्कूलों द्वारा बिना सिलेबस बदले ही हर साल विद्यार्थियों को नई पुस्तकें खरीदने के लिए दबाव बना लिया जाता है। जबकि स्कूलों द्वारा पब्लिशर के साथ मिल कर किताब का महज टाइटल पेज भी बदलवा दिया जाता है। इसके अलावा कई स्कूल साल दो साल के बाद जानबूझ कर अपने स्कूल ड्रेस का रंग बदल देते है। विद्यार्थियों को किताबों की तरह वर्दी भी किसी खास दुकान से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। इस बात की पुष्टी करते हुए डिप्टी डीईओ धर्नवीर सिंह ने बताया कि जांच टीम द्वारा निजी स्कूलों समेत सरकारी स्कूलों में की जानी वाले डम्मी दाखिलों के बारे में भी रिकार्ड को खंगाला जाएगा। आम तौर पर मेडिकल और इंजीनियरिंग के कोर्स की तैयारी के लिए बड़े शहरों में कोचिंग के लिए जाने वाले विद्यार्थियों द्वारा 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए स्कूल में डम्मी दाखिला करवाया जाता है। जोकि सीबीएसई, पीएसईबी और आईसीएसई बोर्ड के तय नियमों की अवहेलना है।
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