अबोहर विधानसभा में कांग्रेस की टिकट पर जाखड़ परिवार का कब्जा है। वर्ष 1972 में स्व. बलराम जाखड़ ने राजनीतिक में कदम रखा था। कांग्रेस के टिकट पर अबोहर से चुनाव लड़े और जीत हासिल की थी। बलराम जाखड़ के बाद उनके बेटे सज्जन जाखड़ फिर सुनील जाखड़ और अब पोता संदीप जाखड़ अबोहर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से इनका दबदबा है, कांग्रेस यहां इसी परिवार पर अपना भरोसा जताती है।
सियासी जानकारों के मुताबिक पिछले विधानसभा चुनाव से पहले किसी अनुसूचित जाति के नौजवान की हत्या हो गई थी, उसे लेकर अबोहर में बहुत स्थिति खराब हो गई थी। जाखड़ परिवार ने पीड़ित परिवार की मदद करने के लिए शराब कारोबारी शिव लाल डोडा से टक्कर ली थी। डोडा को जेल तो पहुंचा दिया लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में अबोहर की जनता ने सुनील जाखड़ के बजाय भाजपा प्रत्याशी अरुण नारंग के सिर पर जीत का सेहरा बांध दिया था।
मौजूदा समय में अबोहर के लोगों ने चुप्पी साध रखी है, ये एक बदलाब का संकेत है। सियासी जानकारों के मुताबिक जीरा विधानसभा हलका, फिरोजपुर देहात, फिरोजपुर शहर, गुरुहरसहाए, जलालाबाद, फाजिल्का व बल्लुआना में कांग्रेस अपने प्रत्याशी बदलती रही है। अबोहर विधानसभा हलका ऐसा है, जहां जाखड़ परिवार को ही कांग्रेस का टिकट मिला।
बलराम जाखड़ मध्य प्रदेश के राज्यपाल के अलावा राजनीति के बहुत उच्च पदों पर विराजमान रह चुके थे। सुनील जाखड़ तीन बार विधायक, कांग्रेस के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष और गुरदासपुर से सांसद के अलावा कई सियासी पदों पर रह चुके हैं। सज्जन जाखड़ अबोहर से विधायक बने थे। अब पोता संदीप जाखड़ शिअद (ब) के प्रत्याशी डॉ. महिंद रिणवा, आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दीप कंबोज और भाजपा के अरुण नारंग के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे हैं। यहां के लोगों का कहना है कि अबोहर ने कई वरिष्ठ नेता पंजाब व केंद्र को दिए हैं, उसके मुकाबले यहां जितना विकास होना चाहिए था, वह नहीं हुआ है। यहां पर न तो रोजगार के साधन हैं और बारिश होने पर अबोहर की सड़कें व गलियां तलाब का रूप धारण कर लेती हैं।