दशमपिता साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर जेल मंत्री सरवण सिंह फिल्लौर गुरुद्वारा साहिब में हाजिरी लगाने के लिए पहुंचे।
वहां जूता चोरों ने जेल मंत्री के जूतों पर हाथ साफ कर दिया। ऐसे में जेल मंत्री को भारी सर्दी के बीच नंगे पांव वापस आना पड़ा। सर्दी से मंत्री साहिब ठिठुर तो रहे थे लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जत्थेदारों से लाए गए जूते लेने से मना कर दिया।
दोपहर करीब 3 बजे जब जेल मंत्री गुरुद्वारा थमजी साहिब पहुंचे तो उस समय भाई रणजीत सिंह का जत्था कीर्तन फतेह करके ही हटा था। मंत्री साहिब ने थोड़ा समय गुरुद्वारा साहिब में बैठकर बाहर निकले तोे देखा कि उनके जूते गायब हो चुके हैं।
मंत्री साहिब के जूते चोरी होने का पता चलते ही जत्थेदार इधर-उधर जूते ढूंढने लगे। ढूंढते समय मंत्रीजी की जुराबें तो मिल गई लेकिन लैदर के जूते नहीं मिल सके। ऐसे में कुछ जत्थेदारों ने मंत्री को अपने जूते देने चाहे तो मंत्री जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि नहीं, चलो दूसरे नू मेरे तों ज्यादा जूते चाहिदे होने हन, इस लई ओह ले गया।
मंत्री ने साथ ही खड़े जत्थेदारों से कैंची चप्पल मंगवाई और उसे ही पहन कर वापस लौटे। इस दौरान उनके साथ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मेंबर सदस्य रणजीत सिंह काहलों, गुरमीत सिंह मठारू शहरी प्रधान, जगजीत सिंह, प्रिंस अरोड़ा और गुरुद्वारा कमेटी मैनेजर सरवण सिंह मौजूद थे।
करतारपुर शहर को पांचवें पिता साहिब श्री गुरु अर्जुन देव जी ने बसाया था। गुरु साहिब जब पहली बार करतारपुर पहुंचे तो वह थमजी साहिब वाले गुरुद्वारा स्थान पर ही पहुंचे। यह स्थान शहर के बीच में है और सबसे ऊंचा भी है। इसी स्थान पर गुरु जी ने बाद में एक किला बनाया था, जो गुरुद्वारा साहिब के पीछे है।
मंगलवार को इस गुरुद्वारा साहिब में दशमपिता साहिब गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान रागी जत्थों ने संगत को कीर्तन श्रवण करवाया। गुरु का लंगर भी चलाया गया।