पंजाब में आईएएस की एक खाली सीट पर नियुक्ति के लिए पीसीएस और कई विभागों के उच्चाधिकारी कतार में हैं।
इस एक सीट के लिए किए गए 29 आवेदनों में से दो आवेदन पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर निर्मल सिंह काहलों के बेटे डा. शिव करन सिंह काहलों और माजूदा शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका की पुत्रवधू परमपाल कौर के भी हैं।
वीरवार को आवेदकों में 15 को इंटरव्यू के लिए बुलाया जबकि बाकी 14 आवेदकों के इंटरव्यू दो सिंतबर को होंगे।
नेताओं के परिवारों से दो आवेदकों के आने के कारण इस सीट के लिए प्रयास कर रहे अन्य आवेदकों में मायूसी भी है।
मुख्य सचिव राकेश सिंह के नेतृत्व में गृह विभाग के प्रमुख सचिव डीएस बैंस, प्रमुख सचिव परिवहन विभाग जगपाल सिंह संधू पर आधारित कमेटी ने प्रत्याशियों के इंटरव्यू लेते हुए यही मुख्य सवाल किया कि आपका नाम आईएएस के लिए क्यों रिकमेंड किया जाए?
कमेटी एक-दो आवेदकों को छोड़कर बाकी सबके जवाब से संतुष्ट नहीं है। ज्यादातर आवेदकों ने साधारण जवाब ही दिए कि वे सेवा करना चाहते हैं।
सूत्रों के अनुसार, पंजाब सरकार द्वारा बनाए नियम ही मलूका की पुत्रवधू के रास्ते में रोड़ा बन सकते हैं।
नियमों के मुताबिक, आईएएस बनने के लिए आठ वर्ष तक डिप्टी कलेक्टर के वेतनमान पर काम करना जरूरी है।
परमपाल कौर 2011 में डीडीपीओ पदोन्नत हुई थीं, इसलिए अभी उनके आठ वर्ष पूरे नहीं हुए हैं।
उधर, डा. शिवकरन सिंह काहलों काफी लंबे अरसे से अमृतसर में डिस्ट्रिक्ट मेडिकल आफिसर तैनात हैं। उनका वेतनमान भी इसी श्रेणी में आता है।
इस एक पद के लिए वीरवार को इंटरव्यू देने वाले अन्य प्रमुख लोगों में पंजाब सरकार के आर्थिक सलाहकार एमएल शर्मा, लोक संपर्क विभाग की सेनू दुग्गल और ओपिंदर सिंह लांबा, तकनीकी शिक्षा विभाग से मोहनबीर सिंह, दलजीत कौर, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंद्रदीप सिंह शामिल थे।
बाकी 14 आवेदकों की इंटरव्यू 2 सितंबर को होगी। इसके बाद कमेटी पांच नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग को भेजेगी और आयोग एक व्यक्ति को आईएएस चुनेगा।