दी जाती थी भयानक यातनाएं
युवती के मस्कट पहुंचते ही उसे ऑफिस के एक कमरे में बंद कर दिया गया और उसका पासपोर्ट और फोन छीन लिया गया। इसके बाद उसका परिवार से संपर्क टूट गया। वहां काम नहीं मिलने पर लड़कियों को बेल्ट से पीटा जाता था और गलत काम करने के लिए कहा जाता था। वहां दी जाने वाली यातना इतनी भयानक थी कि कभी-कभी तो वह बेहोश हो जाती थीं। वहां न तो उन्हें ठीक से खाना दिया गया और न ही बीमार होने पर इलाज ही कराया जाता। वहां पर जब उन्हें किसी तरह फोन मिला तो उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार को फोन किया और इन हालात से अवगत कराया।
एजेंट ने मांगे लाखों रुपए
विधवा मां ने बताया कि जब उन्हें बच्ची के ऐसे हालात के बारे में पता चला तो उन्होंने एजेंट से मिन्नतें करते हुए गुहार लगाई कि उसकी बेटी को वापस ले आओ। एजेंट ने बेटी को वापस लाने के लिए लाखों रुपए की डिमांड की। पैसे न देने की स्थिति में उसने अपनी लड़की की वापसी की उम्मीद छोड़ दी थी। जब उसने कुछ महिलाओं को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने महिला को संत सीचेवाल के बारे में बताया। इसके बाद वह संत सीचेवाल से मिली और बेटी के हालातों के बारे में बताया था।
जिस लड़की ने फंसाना चाहा, उसे भी साथ ले आई पीड़िता
पीड़ित लड़की ने बताया कि भारतीय दूतावास के दबाव के बाद जब एजेंटों ने उसे वापस भेजना चाहा तो उन्होंने उसे भारत भेजने की बजाय आबूधाबी भेज दिया और उसके सारे पैसे छीन लिए। एजेंट की ओर से उसे फंसाने के लिए एक लड़की को वहां भेजा गया। इस पर पीड़िता ने अपनी बुद्धिमत्ता से काम लेते हुए उसके पीछे लगाई गई पंजाब की लड़की को समझा-बुझाकर सही सलामत भारत ले आई। पीड़िता ने संत सीचेवाल का इस बात के लिए भी धन्यवाद किया कि वापसी के समय देर रात तक वह उसकी मदद करते रहे। जिस कारण दोनों लड़कियों की घर वापसी संभव हो सकी।
एजेंटों पर भरोसा न करें लोग
संत सीचेवाल ने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे किसी पर या उनके एजेंटों पर भरोसा न करें और उचित जानकारी के बिना विदेश जाने का निर्णय न लें। अब तक जो मामले उनके सामने आए हैं वे बेहद भयानक हैं। खाड़ी देशों में महिलाओं के साथ लगातार हो रहे शोषण को रोकने की जरूरत है। वहां लड़कियों की स्थिति बहुत दयनीय है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों का आभार जताया, जो इतनी विकट कानूनी प्रक्रियाओं के बावजूद इन लड़कियों को सुरक्षित उनके परिजनों से मिला रहे हैं।