पंजाब के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के किसान मजदूर सेल (पंजाब) के प्रधान इंद्रजीत सिंह जीरा का बुधवार सुबह करीब पांच बजे मोहाली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे कैंसर से ग्रस्त थे। जीरा के पैतृक गांव बस्ती बूटे वाला में शाम तीन बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया। पूर्व मंत्री के निधन पर पंजाब सरकार ने आधे दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।
कांग्रेस नेता अशोक गुप्ता ने बताया कि अकाली-भाजपा सरकार के दौरान इंद्रजीत सिंह जीरा सेहत मंत्री और जेल मंत्री भी रह चुके हैं। 1985 से 2008 तक वह अकाली दल में रहे। वर्ष 1985 में इंद्रजीत सिंह लोकसभा चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन हार गए। इसके बाद 1992 में जीरा हलके से विधानसभा का चुनाव लड़ा तो जीत मिली। इसके बाद फिर वर्ष 1997 में विधानसभा के चुनाव मैदान में उतरे और फिर से विजय प्राप्त की।
अकाली-भाजपा सरकार के दौरान इंद्रजीत सिंह खेल मंत्री और सेहत मंत्री भी रह चुके हैं। वे अकाली दल के टोहरा ग्रुप से जुड़े हुए थे। प्रकाश सिंह बादल की गलत नीतियों के चलते टोहरा ग्रुप अकाली दल से अलग हो गया, तब इंद्रजीत ने भी अकाली दल को अलविदा कह दिया था।
2008 में कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा से इंद्रजीत का संपर्क हुआ तो बाजवा ने कांग्रेस हाईकमान से इंद्रजीत को किसान मजदूर सेल पंजाब का चेयरमैन बनाने की सिफारिश की। इंद्रजीत ने अकाली-भाजपा सरकार के दौरान किसानों के हक में कई प्रदर्शन किए। लंबे समय तक किसानों के हक की लड़ाई लड़ते रहे। अपने हलके में किसानों से काफी सहानुभूति प्राप्त की। उन्होंने अपने बेटे कुलबीर सिंह जीरा को राजनीति के मैदान में लाने के लिए दिन रात एक किया। कांग्रेस ने कुलबीर जीरा को 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट देकर मैदान में उतारा। बेटे को चुनाव में जीत दिलाने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की। अब उनके बेटे कुलबीर सिंह जीरा विधायक हैं।