दिल्ली के टीकरी बॉर्डर से आंदोलन समाप्त कर किसान अपने घरों को लौट रहे हैं। रविवार को बठिंडा के रास्ते अपने गांव बरगाड़ी जा रहे अमर सिंह खालसा ने बताया कि किसानों ने कृषि कानून वापस करवाने के लिए आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ी है। किसानों को देश के लोगों का भरपूर साथ मिला जिस कारण आज किसान जीत हासिल करने के बाद अपने घरों को वापस जा रहे हैं।
किसान अमर सिंह बरगाड़ी ने बताया कि उनके पिता ने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी और उन्होंने पिछले एक वर्ष 8 दिन से किसानों की आजादी के लिए कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने बताया कि वह भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां से संबंधिंत हैं। जो-जो किसानों के साथ टीकरी एवं सिंघु बॉर्डर पर हुआ उसको वो बयां नहीं कर सकते, लेकिन आने वाली पीढ़ियां किसानों की इस दूसरी आजादी की लड़ाई को याद रखेंगी। टीकरी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस एवं केंद्र सरकार की एजेंसियों और शरारती तत्वों द्वारा किसानों को दबाने का प्रयास भी किया गया था। लेकिन किसानों ने अपनी एकता का सबूत देते हुए शरारती तत्वों को गड़बड़ करने से रोका।
एक वर्ष 8 दिन बाद घर लौटूंगा
किसान अमर सिंह ने बताया कि उनकी आयु लगभग 70 साल है। वे किसान आंदोलन की शुरुआत से ही दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर बरगाड़ी ब्लॉक के किसानों के साथ पहुंच गए थे। उन्होंने पहले दिन से ही सोच लिया था कि या तो कृषि कानून वापस करवाकर जाएंगे नहीं तो उनका शव किसान यूनियन के झंडे में लिपट कर वापस जाएगा।
कृषि कानून वापस करवाना आसान नहीं था
किसान अमर सिंह ने बताया कि देश की केंद्र भाजपा सरकार लगातार किसानों का दबाने का प्रयास कर रही थी और मीडिया को अपने इशारों पर नचाकर किसानों के खिलाफ आए दिन झूठी खबरें चलाई जा रही थी। इसके चलते कभी कभी लगता था कि कृषि कानून वापस करवाना आसान नहीं है, लेकिन किसानों की एकता को केंद्र सरकार तोड़ने में नाकाम रही और खुद एक वर्ष बाद किसानों के आगे झुक गई।
अब आम लोगों के हकों के लिए पंजाब भर में किसान लड़ेंगे लड़ाई
किसान अमर सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार को हराकर किसान अब घरों को लौट रहे हैं। अब किसान प्रदेश के आम लोगों के हकों के लिए लड़ाई लड़ेंगे। अब लोग किसानों के साथ अपने हकों के लिए लड़ाई लड़ा करेंगे।