केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 24 दिन के भीतर दो बार पंजाब का दौरा कर चुके हैं। अपने इन दौरों के दौरान शाह ने पीआईटी एनडीपीएस (प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज) एक्ट और एनकोर्ड की बैठकों के मुद्दे पर पंजाब सरकार को निशाने पर लिया।
इसके बाद अब पंजाब भाजपा के नेता भी इसे सियासी मुद्दा बनाते हुए सरकार की घेराबंदी में जुटे हैं। भाजपा नेताओं की ओर से लोगों को इन मुद्दों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है और इसी मसले पर सरकार से जवाब भी मांगा जा रहा है।
दरअसल, ये दोनों मुद्दे सामान्य सियासी मसलों से कुछ अलग हैं, जिनके बारे में आम लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। शाह ने 30 सितंबर को जालंधर में आयोजित रैली और 20 अक्तूबर को लुधियाना में प्रेसवार्ता के दौरान इन दोनों मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। शाह यह स्पष्ट कर चुके हैं कि पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा का मुख्य मुद्दा नशा होगा। दरअसल, पीआईटी एनडीपीएस एक्ट और एनकोर्ड की बैठकें भी नशे के खिलाफ कार्रवाई और गतिविधियों से जुड़ी हैं।
शाह ने दोनों बार सवाल किया कि नशे के खिलाफ महीनों से अभियान चला रही पंजाब सरकार ने अब तक पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज क्यों नहीं किए जबकि पंजाब में नशा तस्करी की समस्या गंभीर है। इसके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री ने यह भी पूछा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार ने अब तक एनकोर्ड की कितनी बैठकें की हैं।
शाह दावा कर चुके हैं कि पंजाब में अब तक पुलिस ने पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत एक भी मामला दर्ज नहीं किया जबकि देश में 929 लोगों को इसके तहत हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा देशभर में एनकोर्ड की 48 बैठकें हो चुकी हैं। शाह ने पंजाब सरकार से पूछा था कि राज्य में एनकोर्ड की कितनी बैठकें हुई हैं।
उधर, पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि मार्च 2022 से अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 95 हजार से अधिक मामले दर्ज हुए और 1.27 लाख से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। पुलिस ने 7,265 किलो हेरोइन बरामद करने का दावा किया। उनके अनुसार नशे के हॉटस्पॉट पर 60 दिन का विशेष मिशन शुरू किया गया है।
पीआईटी एनडीपीएस एक्ट : नशे के खिलाफ सख्त कानून
पीआईटी एनडीपीएस (प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज) अधिनियम नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने के लिए बनाया गया एक केंद्रीय कानून है। इसके तहत संबंधित प्राधिकारी नशा तस्करी में लिप्त लोगों, वित्तपोषकों और संगठित नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों को अवैध गतिविधियां रोकने के उद्देश्य से एहतियातन हिरासत में रखने का आदेश दे सकते हैं। यह सामान्य आपराधिक मुकदमे में गिरफ्तारी से अलग प्रक्रिया है।
ड्रग तस्करी पर शिकंजा कसने के लिए एनकोर्ड
नारको कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकोर्ड) की शुरुआत केंद्र सरकार ने 22 नवंबर 2016 को की थी। इसका उद्देश्य नशे की तस्करी और खपत पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र, राज्यों और विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करना है। वर्ष 2019 में इसे चार स्तरीय व्यवस्था में बदला गया। इसके तहत केंद्रीय, राज्य और जिला स्तर पर बैठकें होती हैं। इनमें नशा तस्करी, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, जांच, कार्रवाई और रोकथाम की समीक्षा की जाती है। राज्य स्तर की बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव और जिला स्तर की बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी करते हैं।