पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और आपसी खींचतान के बीच हाईकमान ने प्रभारी का चेहरा बदलकर पार्टी के भीतर नई राजनीतिक कवायद शुरू कर दी है। गुटबाजी के गढ़ में सचिन पायलट के लिए कांग्रेसियों को एकजुट करने की परीक्षा होगी। कांग्रेस ने भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी पद से हटाकर उनकी जगह सचिन पायलट को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का महासचिव प्रभारी बनाया है।
बघेल को अब असम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंजाब में चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस के एक नाराज धड़े में बघेल की भूमिका को लेकर असंतोष भी था। ऐसे में पायलट की नियुक्ति को केवल संगठनात्मक बदलाव के बजाय चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस को नए सिरे से साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी के आदेश के मुताबिक पायलट तत्काल प्रभाव से पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के भीतर आमने-सामने खड़े गुटों को एक मंच पर लाने की होगी। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से जुड़े खेमों के बीच मतभेद लंबे समय से पार्टी के लिए परेशानी का कारण रहे हैं। इसके अलावा कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी अलग-अलग मुद्दों पर अपनी नाराजगी जताते रहे हैं।
बघेल ने अपने कार्यकाल में दोनों पक्षों के नेताओं के साथ बातचीत कर विवाद को थामने की कोशिश की। जुलाई में उन्होंने नेताओं से बातचीत के बाद हाईकमान को रिपोर्ट भी सौंपी थी और तत्काल नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज किया था। बावजूद इसके संगठन में खींचतान खत्म नहीं हुई। अब प्रभारी बदलने के फैसले से हाईकमान ने साफ संकेत दिया है कि चुनावी तैयारी से पहले संगठन में पैदा हुई दरार को पाटना उसकी प्राथमिकता है।
पायलट के लिए आसान नहीं होगी राह
पायलट की सबसे बड़ी परीक्षा केवल नेताओं को साथ बैठाने की नहीं, बल्कि उन्हें चुनाव तक साथ बनाए रखने की होगी। टिकट वितरण के दौरान गुटबाजी और तेज होने की आशंका रहेगी। किस खेमे को कितनी राजनीतिक हिस्सेदारी मिलेगी, नेतृत्व का संतुलन कैसे बनेगा और चुनावी रणनीति में किसकी कितनी भूमिका होगी। इन सवालों पर पायलट को शुरुआत से ही संतुलन साधना होगा। दूसरी बड़ी चुनौती संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की है। उन्हें चन्नी समर्थक नेताओं, वड़िंग समर्थक नेताओं और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच भरोसा कायम करना होगा। टिकटों को लेकर संभावित खींचतान, नेतृत्व के मुद्दे पर मतभेद और चुनावी रणनीति पर असहमति उनके लिए बड़ी परीक्षा होगी।
राहुल को सौंपी थी रिपोर्ट
बघेल के कार्यकाल में ही पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए थे। जुलाई में उन्होंने नेताओं से बातचीत के बाद हाईकमान को अपनी रिपोर्ट भी सौंपी थी और तत्काल नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज किया था। अब पायलट को उसी रिपोर्ट और पिछले महीनों में उभरे विवादों की पृष्ठभूमि में आगे की रणनीति बनानी होगी। कांग्रेस हाईकमान ने बघेल को हटाकर नेतृत्व का चेहरा जरूर बदल दिया है लेकिन असली परीक्षा अब पायलट की होगी।
पायलट को बधाई, नेताओं ने जताया भरोसा
पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने पर सचिन पायलट को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बधाई दी। दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर पायलट को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। रंधावा ने कहा कि पायलट का अनुभव, कुशल नेतृत्व और जनता से जुड़ाव राज्य में पार्टी संगठन को एक नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगा। राजा वड़िंग ने कहा कि सचिन पायलट की ऊर्जा और कार्यकुशलता विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेगी।