दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार एसआई जगमेहर सिंह सेवानिवृत्ति के करीब है जबकि एएसआई सुरेंद्र सिंह की भी सेवा अवधि ज्यादा नहीं बची है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या दोनों ने मोटी रकम लेकर आरोपी को भगाने की साजिश में साथ दिया था या फिर किसी बड़े नेटवर्क के निर्देश पर काम कर रहे थे। रिश्वत के एंगल, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
डीजीपी ने बैठाई विभागीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को डीएसपी पूनम दिलावरी और डीएसपी एसपीएस सौंधी से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। जांच का दायरा केवल गिरफ्तार पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रखा गया है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में किसी अन्य पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका तो नहीं थी।
पहले भी सुरक्षा व्यवस्था पर उठ चुके हैं सवाल
विक्रम वाधवा का नाम पहली बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवादों में नहीं आया है। अप्रैल 2026 में अदालत में पेशी के दौरान वह पुलिस हिरासत में मोबाइल फोन पर बात करता कैमरे में कैद हुआ था।