पंजाब में नियमित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति में देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब के मुख्य सचिव से जवाब तलब करते हुए 10 दिन में यह बताने को कहा है कि राज्य में नियमित डीजीपी की नियुक्ति कब तक की जाएगी। हाईकोर्ट ने कहा कि डीजीपी का पद बेहद महत्वपूर्ण है और इसका सीधा संबंध राज्य की कानून-व्यवस्था से है। ऐसे अहम पद को अनिश्चितकाल तक अंतरिम व्यवस्था के तहत नहीं चलाया जा सकता।
याचिकाकर्ता निखिल थम्मन ने अदालत को बताया कि पंजाब सीमावर्ती राज्य है और ऐसे में पुलिस प्रमुख के पद पर नियमित नियुक्ति जरूरी है। याचिका में कहा गया कि गौरव यादव को अंतरिम व्यवस्था के तहत डीजीपी की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने जुलाई में नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजा था। इसमें एसएस चौहान, हरप्रीत सिद्धू और गौरव यादव के नाम शामिल बताए गए हैं।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि नियमित डीजीपी की नियुक्ति से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है और आठ अक्तूबर को उस पर सुनवाई प्रस्तावित है। याचिकाकर्ता ने कहा कि पुलिस प्रमुख की नियुक्ति में अनिश्चितता से राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब मुख्य सचिव को तय समय में सरकार का पक्ष स्पष्ट करना होगा।