पंजाब कांग्रेस में बगावत खत्म करने के लिए हाईकमान दो फॉर्मूलों पर विचार कर रहा है। दरअसल, पिछले दिनों इसी मसले पर दिल्ली में हुई एक बैठक के दौरान प्रियंका गांधी ने हाईकमान को सलाह दी थी कि चुनाव से ठीक पहले पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन चुनाव में पार्टी को नुकसान दे सकता है। लिहाजा अब सूबे में जोन वाइज दो अध्यक्ष लगाने पर विचार किया जा रहा है।
दरअसल, पंजाब कांग्रेस में जब नेतृत्व परिवर्तन और चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने के मुद्दे पर बगावत शुरू हुई तो उस वक्त राहुल गांधी विदेश में थे। उस दौरान प्रियंका गांधी ने ही इस मसले पर कमान संभालते हुए अपनी एक टीम पंजाब भेजी थी। उसके बाद पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी इस गुटबाजी को खत्म करने में जुटे रहे। बागी नेता बघेल और वेणुगोपाल से मिल चुके हैं और इन दोनों नेताओं की रिपोर्ट राहुल गांधी व राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की टेबल पर है। उधर, प्रियंका गांधी की टीम की रिपोर्ट भी हाईकमान के पास है।
इस सारी कसरत के बाद न तो पंजाब कांग्रेस में बगावत खत्म हुई है न ही मतभेद। ताजा उदाहरण 28 अगस्त को बाबा बकाला साहिब में रखड़ पुण्या मेले के दौरान सजाए गए कांग्रेस के मंच पर दिखा। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी गुट ने प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग व प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल की गौर मौजूदगी में सियासी सम्मेलन किया। पार्टी सूत्र बताते हैं कि इस सम्मेलन के लिए वड़िंग को न्योता दिया गया था मगर वे नहीं पहुंचे। इसी गुटबाजी को बढ़ता देख पार्टी अब नए फॉर्मूले पर मंथन कर रही है।