जालंधर में आम आदमी पार्टी के नेता लक्की ओबरॉय की दिनदहाड़े हत्या के बाद जालंधर की राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के जालंधर दौरे के दौरान कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह कोटली और पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर के बीच तीखा टकराव हुआ, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया।
जालंधर में लक्की ओबरॉय की दिनदहाड़े हुई नृशंस हत्या कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पंजाब में बिगड़ती कानून व्यवस्था और आप सरकार की प्रशासनिक विफलता का सबसे भयावह परिणाम है। यह कहना है पंजाब यूथ कांग्रेस के सचिव अंगद दत्ता का, जिन्होंने इस हत्या के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
अंगद दत्ता ने कहा कि यह घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके संकेत पहले ही मिल चुके थे। यदि समय रहते प्रशासन ने चेतावनियों को गंभीरता से लिया होता, तो इस हत्या को रोका जा सकता था।
अंगद दत्ता ने खुलासा किया कि उन्होंने 22 दिसंबर 2025 को उपायुक्त जालंधर को लिखित रूप में आगाह किया था। पत्र में शहर में तेजी से बढ़ रही अवैध ‘प्रेसिडेंटशिप संस्कृति’, हथियारबंद युवाओं के गिरोह और समानांतर सत्ता केंद्रों के सक्रिय होने की जानकारी दी गई थी। साथ ही तत्काल कानूनी और निवारक कार्रवाई की मांग भी की गई थी। दत्ता ने कहा, कि मैंने साफ तौर पर चेताया था कि यदि इन अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगी, तो जालंधर हिंसक टकराव की ओर बढ़ेगा। प्रशासन ने उस चेतावनी को नजरअंदाज किया और आज उसके गंभीर परिणाम सामने हैं।
यूथ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि आप सरकार कानून का सख्ती से पालन कराने, युवाओं के अपराधीकरण पर रोक लगाने और गैरकानूनी सत्ता ढांचों को खत्म करने में पूरी तरह विफल रही है। इसी लापरवाही ने ऐसा माहौल तैयार किया, जिसमें लक्की ओबरॉय ती हत्या संभव हो सकी। जब अवैध ताकतों को खुलेआम काम करने दिया जाए, जब चेतावनियों को अनसुना किया जाए और जब निवारक पुलिस व्यवस्था ध्वस्त हो जाए, तो सरकार अपनी लापरवाही के कारण इस तरह के अपराधों की सहभागी बन जाती है।
अंगद दत्ता ने कहा कि आप सरकार ने खूनखराबे के बाद बयान देने की आदत डाल ली है, लेकिन हिंसा रोकने की जिम्मेदारी से उसने मुंह मोड़ लिया है। कानून व्यवस्था का मतलब हत्या के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करना नहीं, बल्कि हत्या होने से पहले उसे रोकना है। इस कसौटी पर आप सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।