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पंजाब: समानता का जमाना है तो राजनीति में भी होना चाहिए महिलाओं को समान अधिकार

Fri, 17 Dec 2021 05:48 PM IST
ajay kumar रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

महिलाओं ने राजनीति में समानता के अधिकार की मांग की। उनका कहना है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ईमानदारी से काम करती हैं जबकि पुरुषों में अहम होता है। 
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पंचायत चुनाव - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजनीति में महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाले दलों की खोज खबर लेने के लिए पंजाब की महिलाएं तैयार हैँ। महिलाओं का मानना है कि उन्हें आगे बढ़कर अपने अधिकार छीनने होंगे, तभी वे आजादी से काम कर सकेंगी। आज महिलाओं का वोट अनुपात लगभग पुरुषों के बराबर ही है लेकिन बावजूद इसके वे राजनीति में आगे नहीं बढ़ पातीं। राजनीतिक पार्टियों में उन्हें मजबूरी में ही आरक्षण दिया जाता है लेकिन काम करने में बराबरी का अधिकार नहीं दिया जाता। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को बराबर अधिकार देना महज किताबों में एक जुमला लगता है। 

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पूर्व कैबिनेट मंत्री व समाज सेविका प्रो. लक्ष्मीकांता चावला कहती हैं कि महिलाओं को आरक्षण देना सिर्फ कहने की बातें हैं। महिलाओं के राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर अलग-अलग पार्टियों की अलग-अलग राय है। मतदान करते समय सबसे पहले अच्छे उम्मीदवार का चयन करना जरूरी है। यह नहीं देखूंगी कि कौन सी राजनीतिक पार्टी उन्हें क्या दे रही है। बल्कि यह देखूंगी कि कौन सा उम्मीदवार समाज खास कर महिलाओं के लिए बेहतर कर सकता है।

समाज सेविका और राष्ट्रपति अवार्डी डॉ. स्वराज ग्रोवर कहती हैं कि जब महिलाओं का वोट अनुपात पुरुषों के बराबर है तो उन्हें राजनीति में बराबरी का मौका मिलना चाहिए लेकिन असल में ऐसा नहीं है। पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ईमानदारी से काम करती हैं जबकि पुरुषों में अहम रहता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाएं घर और समाज के लिए ज्यादा संवेदनशील होती हैं। वे घर में बच्चों की शिक्षा और सेहत के प्रति सजग रहती हैं तो राजनीति में मौका मिलने पर भी उनकी सोच समाज के प्रति वैसी ही होगी। 

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सिदाना इंस्टीच्यूट ऑफ एजूकेशन की प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. जीवन ज्योति सिदाना कहती हैं कि मौजूदा समय में जहां महिला उम्मीदवार घोषित होती हैं, वहां उनके पति और परिवार के अन्य लोग ही ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं। महिला के जीतने के बाद भी वही स्थिति रहती है। क्योंकि पति या परिवार के अन्य सदस्य ही उनकी जगह पर काम करते हैं। वे मतदान करने से पहले वे उम्मीदवारों का मूल्यांकन अवश्य करेंगी। यह देखेंगी कि पिछले समय के दौरान कौन-कौन से नेता ने क्या-क्या वादे किए और जनता से किए कितने वादे पूरे किए। इसके कोई फर्क नहीं पड़ता कि उम्मीदवार पुरुष है या महिला। 

गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में बिजनेस स्कूल यूएसबी की पूर्व चेयरपर्सन डॉ. जसवीन कौर संधू कहती हैं कि समाज की तरक्की के लिए महिलाओं का राजनीति में आगे बढ़कर काम करना बहुत जरुरी है। आज समानता का जमाना है तो महिलाओं को भी राजनीति में समान ही मौके दिए जाने चाहिए। यह जरुरी नहीं कि महिला उम्मीदवार ही बेहतर हों। पुरुष भी समाज के लिए ईमानदारी से काम करते हैं। उन्होंने महिला मतदाताओं से कहा कि मतदान के दिन वे अपना मत परिवार के दबाव में नहीं दें बल्कि अपनी सोच के मुताबिक ही करें।

डॉ. इंदू वर्मा ने बताया कि अक्सर पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा ईमानदारी और मेहनत से काम करती हैं। जब राजनीति में मौका मिले तो वहां भी समाज का विकास करने और बेहतर करने में ज्यादा मेहनत से काम कर बेहतर नतीजे लाएंगे। वे मतदान केंद्र में जाने से पहले उम्मीदवारों की पूरी जानकारी हासिल करेंगी। देखेंगी कि कौन सा उम्मीदवार कितनी बात जीता और उस दौरान उसने लोगों के लिए क्या-क्या किया। वे उसी उम्मीदवार को वोट देंगी जो देश और राज्य को आगे ले जाने में अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाए।
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