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Amritsar News: युद्ध के तनाव में दिखाई एकजुटता, मुहावा के लोगों ने नहीं छोड़ा गांव

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सीमांत गांव मुहावा से पंकज शर्मा
भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित गांव मुहावा ने कई बार युद्ध का संताप झेला है। हर बार जब सीमा पर तनाव बढ़ता है, इस गांव के लोग सबसे पहले उसकी तपिश महसूस करते हैं। हाल ही में भारत-पाकिस्तान सीमा पर एक बार फिर से युद्ध के बादल मंडराए। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने गांव में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। कई लोगों ने अपने परिवारों की सुरक्षा के लिए गांव छोड़ने का मन भी बना लिया था, लेकिन भारत की ओर से पाकिस्तान पर दिखाई गई सख्ती और भारतीय सेना की मजबूती ने गांव वालों का मनोबल बढ़ाया। लोगों ने निर्णय लिया कि वे इस बार गांव नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने सेना पर अपना विश्वास जताते हुए कहा कि अगर लड़ाई छिड़ती है, तो वे भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मन का मुकाबला करेंगे।



सीमा पर तनाव के दौरान गांव के लोगों ने कई बार पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय क्षेत्र में आते देखे गए। भारतीय सेना की तरफ से इन ड्रोन को मार गिराने की कार्रवाई होती रही। इस दौरान गांववालों में भय का माहौल जरूर था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। गांव निवासी हरचंद सिंह कहते हैं, डर तो लगा था, पर सेना का भरोसा था। हमने तय कर लिया कि इस बार गांव नहीं छोड़ेंगे। रेशम सिंह बताते हैं कि ड्रोन की आवाज सुनते ही लोग सतर्क हो जाते थे। हम लोग अपने परिवार को सुरक्षित जगह पर भेजने की तैयारी करते थे, लेकिन मन में एक दृढ़ निश्चय था कि हम यहीं रहेंगे।
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पाकिस्तान भरोसे लायक देश नहीं

अब जब सीमा पर स्थिति कुछ हद तक शांत है, गांव में एक नई उम्मीद का संचार हुआ है। साहिब सिंह बताते हैं कि जंग का डर अब भी है, पर सेना की ताकत पर हमें पूरा भरोसा है। हम यहां रहेंगे और दुश्मन का मुकाबला करेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भरोसे लायक देश नहीं है। कभी भी भारत पर हमला कर सकता है। गांव के लोग अब अधिक सतर्क रहते हैं। सीमा सुरक्षा बलों की गतिविधियां भी बढ़ा दी गई हैं। चौकसी के साथ-साथ गांव में सुरक्षा के अन्य इंतजाम भी कड़े कर दिए गए हैं। गांववालों की एक ही मांग है कि सीमा पर सुरक्षा और मजबूत की जाए। साहिब सिंह कहते हैं कि हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे डर के साये में बड़े हों। गांव के लोग चाहते हैं कि सरकार उनके लिए बंकर और सुरक्षा शेल्टर का निर्माण करवाए, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में सुरक्षित रहा जा सके। सीमांत गांव मुहावा ने एक बार फिर से दिखा दिया है कि भारतीय नागरिक किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना साहस और हिम्मत से कर सकते हैं। सरकार और सेना के प्रति उनके विश्वास ने उन्हें अपने घरों में सुरक्षित रखा। आज, गांव का माहौल पहले जैसा सामान्य तो नहीं है, लेकिन उम्मीद की एक किरण जरूर दिखाई दे रही है।
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