पंजाब पुलिस के एक सिपाही ने बेटी को अफसर बनाने का सपना देखा। पिता ने उसे उच्च शिक्षा दिलाकर बुलंदियों तक पहुंचाया। खुद पूरी उम्र सिपाही रहे, लेकिन अपनी बेटी को उच्च अधिकारी बनाकर ही दम लिया। पंजाब पुलिस के सेवानिवृत इंस्पेक्टर भगवान सिंह ने बेटी को बेहतर शिक्षा दिलाई। आज जब बेटी को एडीसी गुरदासपुर के रूप में देखते हैं, तो सीना खुशी से चौड़ा हो जाता है।
बेटी की सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पद पर नियुक्ति के बाद उनका विभाग में भी कद बढ़ा और सीनियर अधिकारियों ने अपने सिपाही को भरपूर सम्मान दिया। भगवान सिंह कहते हैं कि वर्ष 1981 में पंजाब पुलिस में एक सिपाही के रूप में ज्वाइन किया। तीन बेटे और एक बेटी है। 1986 में बेटी ने जन्म लिया, तो उसका नाम अमनदीप कौर रखा। उन्होंने बेटी को खुद के लिए भाग्यशाली मानते हुए उसे उच्च शिक्षा दिलवाकर एक बड़ा अधिकारी बनाने का फैसला कर लिया। उसे राजनीति शास्त्र में एमए (मास्टर इन आर्ट्स) की डिग्री करवाई। मार्च 2007 में बेटी अमनदीप ने पीसीएस की परीक्षा पास की और पंजाब राज्य सेवा में एसडीएम बन गई। इस दौरान ही वर्ष 2012 में उन्होंने बेटी की शादी डॉ. मलकीयत सिंह से की, जो गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं।
भगवान सिंह कहते हैं कि बेटी की शादी के बाद भी बेटी की इच्छा के मुताबिक पढ़ाई जारी रखने में मदद की। वर्ष 2017 में अमनदीप कौर ने इंडो-यूएस रिलेशन में पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली और उनके नाम के आगे डॉक्टर लग गया। उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म के वक्त तो उन्हें खुशी मिली थी, लेकिन आज एक सफल बेटी का पिता बनकर उन्हें खुद पर बहुत गर्व महसूस होता है।