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पहाड़ों पर बारिश से पंजाब में नदियां उफान पर, पांच हजार की आबादी वाले सात गांव टापू बने

Thu, 27 Aug 2020 09:46 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो मनन सैनी, गुरदासपुर (पंजाब)
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रावी नदी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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पहाड़ी इलाकों में हो रही तेज बारिश के चलते उज्ज दरिया में जल स्तर बढ़ने के साथ ही मकौड़ा पत्तन के रावी नदी भी पानी उफान पर है। इस कारण नदी पार भारत-पाक सीमा से सटे सात गांव मम्मी चकरंजा, भरियाल, कुक्कर, तूर, चेबे, चुंबर, कजले, लसियान सहित कई गांवों में किश्ती भी बंद कर दी गई है। गांव भारत से कट कर टापू में तबदील हो गए हैं। बुधवार को जिले में तकरीबन डेढ़ घंटे हुई तेज बारिश से नदी में जल स्तर और बढ़ गया है।

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गौरतलब है कि मानसून से पहले जिला प्रशासन की ओर से मकौड़ा पत्तन में रावी नदी पर रखे गए अस्थायी प्लाटून पुल को पहले से ही उठा लिया गया था। इसके बाद नदी पार बसे सात गांवों के पांच हजार लोगों को नदी पार करने के लिए किश्ती का ही सहारा था। नदी में अब जल स्तर बढ़ने से किश्ती को भी बंद कर दिया गया है।


नदी पार बसे गांव भरियाल के मजदूर सतीश कुमार, मोहन लाल और गुरदेव सिंह ने बताया कि लॉकडाउन के कारण पहले से ही वे मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। बीच में बहरामपुर शहर में दिहाड़ी लग रही थी लेकिन पानी बढ़ने से अब वे दिहाड़ी पर भी नहीं जा पाएंगे। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

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रावी दरिया में जल स्तर बढ़ने से खेत तालाब का रूप धारण कर चुके हैं। किसान जसवंत सिंह, अर्जुन सिंह, कुलदीप सिंह ने बताया कि नदी पार उनके खेतों में धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। उन्होंने जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।

हर बार वादा कर जाते हैं नेता, पूरे कभी नहीं हुए
नदी पार बसे गांवों के लोगों ने कहा कि उन्हें तो ऐसा लग रहा है कि जैसे उन्हें देश का हिस्सा माना ही नहीं जाता। राजनेता चुनाव के समय किश्ती में बैठकर उनके पास वोट लेने आते हैं। हर बार नदी पर पक्का पुल बनाने का वादा किया जाता है लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनकी सुध तक नहीं ली जाती। पिछले दशकों से यह संताप झेलते आ रहे हैं। कई बार चुनाव का बायकाट कर चुके हैं लेकिन उनके अच्छे दिन नहीं आए।
 
पानी बढ़ने से किश्ती हटा ली गई होगी लेकिन जल्द ही आवागमन का साधन बहाल किया जाएगा और वहां के लोगों को कोई मुश्किल पेश न आए इसका ध्यान रखा जाएगा। मोहम्मद इश्फाक, डिप्टी कमिश्नर, गुरदासपुर
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