अमृतसर में एतिहासिक गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से गायब हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 267 पावन स्वरूपों की जांच से पहले श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के आदेश पर इस मामले से जुड़े सारे रिकॉर्ड को सील कर दिया गया है। श्री अकाल तख्त के सचिवालय के अधिकारी की मौजूदगी में एसजीपीसी के पब्लिकेशन व जिल्दसाजी विभाग के कर्मचारियों ने अलमारियों में ताले लगाए।
तालों पर कपड़ा बांध कर लाख से सील किया गया है। श्री अकाल तख्त के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह वरपाल के अनुसार रिकॉर्ड सील करने की कार्रवाई जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के आदेश के बाद की गई है। जत्थेदार के निजी सहायक जसपाल सिंह ने बताया कि संगत को आशंका थी कि रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ हो सकती है। इसलिए 2015 से लेकर 2020 तक रिकॉर्ड सीलकर अलमारी में रख दिया गया है। जांच के लिए जिसकी नियुक्ति होगी, वही इस सील अलमारी को खोलकर रिकॉर्ड निकाल सकेंगे।
रविवार को एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कार्यकारिणी की एक आपात बैठक बुलाकर इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से अपील की थी। उन्होंने मामले की जांच किसी रिटायर सिख जज से करवाने की मांग की थी। जत्थेदार ने एसजीपीसी के इस आग्रह को स्वीकार कर लिया है।
अभी तक मामले की जांच के लिए किसी नाम की घोषणा तो नहीं की गई है लेकिन जांच से पहले इस मामले के साथ जुड़े सारे रिकॉर्ड को सीलकर जत्थेदार ने कुछ स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। सूत्रों के अनुसार एसजीपीसी ने पब्लिकेशन और जिल्दसाजी विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला कर दिया है लेकिन अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पा रही है।