पूर्व मंत्री प्रोफेसर लक्ष्मीकांता चावला ने मेयर कर्मजीत सिंह रिंटू की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें पत्र लिखा है। प्रोफेसर चावला ने पत्र में मेयर को लिखा है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में ऊंचा स्थान पाने के लिए आपके काम करने का तरीका बेहद निंदनीय है। निगम को सफाई की चिंता केवल हाल गेट से लेकर श्री दरबार साहिब व सिविल लाइन एरिया तक है। ऐसा लगता है कि जिले के अन्य इलाकों से निगम का कोई नाता नहीं है। प्रोफेसर चावला ने कहा कि निगम केवल कुछ क्षेत्रों की सफाई दिखाकर स्वच्छता सर्वेक्षण में ऊंचे अंक पाना चाहता है।
उन्हें सरकारी सर्वेक्षणों पर भी आश्चर्य है कि जिस अमृतसर को खुले में शौच मुक्त घोषित करवा लिया है, क्या वह सचमुच खुले में शौच मुक्त है। जो लोग सड़कों पर बैठे हैं, रात को फुटपाथ पर सोते हैं, वह शौच के लिए कहां जाते हैं, इस बारे में कभी निगम ने नहीं सोचा। रैन बसेरे कबाड़ बने हुए हैं। लाखों रुपयों से बने भवन मिट्टी में मिल रहे हैं, इसकी चिंता मेयर क्यों नहीं कर रहे हैं। जिस शहर में हजारों लावारिस कुत्ते सड़कों पर ही गंदगी बिखेर रहे हैं, क्या उस शहर को खुले में शौच मुक्त कहेंगे?