लोकसभा सीट अमृतसर हमेशा ही हॉट सीट रही है। गुरु नगरी अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब, दुर्ग्याणा तीर्थ और श्री राम तीर्थ जैसे प्रसिद्ध धार्मिक महत्व वाले स्थान होने के कारण देश दुनिया की नजर इस सीट पर होने वाले मुकाबले पर रहती है।
अमृतसर लोकसभा सीट देश के 543 व राज्य के 13 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसमें वर्तमान में 9 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा नरसंहार अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुआ था। इसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच जो बंटवारा हुआ उस समय भी अमृतसर में बड़ा हत्याकांड हुआ।
पंथक गतिविधियों का केंद्र होने के बावजूद भी इस संसदीय क्षेत्र में हमेशा ही कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार सियासी बिसात बदली हुई है। प्रदेश की सत्ता में आम आदमी पार्टी काबिज है। पहली बार सूबे में अकाली दल और भाजपा आमने-सामने है।
कांग्रेस के सामने अमृतसर में अपना गढ़ बचाने की चुनौती है। ऐसे में इस बार यहां मुकाबला चौकोना हो गया है। बदले समीकरण के बीच इस पर सियासी दल के लिए यहां जीत आसान नहीं दिख रही है। इसी के मद्देनजर प्रत्याशी घोषित कर चारों प्रमुख दलों ने प्रचार में ताकत झोंक दी है।
अमृतसर संसदीय क्षेत्र में नौ हलके, सात में आप के विधायक
लोकसभा सीट के अधीन नौ विधानसभा क्षेत्र अमृतसर वेस्ट, अमृतसर पूर्व, अमृतसर दक्षिण, अमृतसर नॉर्थ, अमृतसर सेंट्रल, राजासांसी, अजनाला, मजीठा और अटारी विधानसभा क्षेत्र आते हैं। मौजूदा समय में मजीठा विधानसभा को छोड़कर सभी विधानसभा क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। मजीठा सीट अकाली दल बादल के पास है, जबकि राजासांसी में कांग्रेस एमएलए है।
जिस दल का प्रत्याशी जीता, उसकी नहीं बनी सरकार
अमृतसर सीट पर सभी बड़ी पार्टियों की ओर से अपने उम्मीदवार एलान कर दिए हैं। भाजपा हमेशा ही इस सीट पर बाहर से उम्मीदवार लाकर खड़ा करती रही है। इस सीट पर पहले नवजोत सिंह सिद्धू को, फिर अरुण जेटली इसके बाद आईएएस हरदीप पुरी और अब आईएफएस तरणजीत सिंह संधू पर दांव खेला है। आमतौर पर यहां से जिस भी पार्टी का उम्मीदवार जीतता रहा है, वहीं केंद्र में दूसरी पार्टी की सरकार रही है। जिसके चलते अमृतसर को वह लाभ हासिल नहीं हो पाया, जिसका कई मायनों में अहम इस सीमावर्ती क्षेत्र को मिलना चाहिए था। इस बार कांग्रेस ने निवर्तमान सांसद गुरजीत सिंह औजला, आम आदमी पार्टी ने राज्य के कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल और अकाली दल बादल ने पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी को उम्मीदवार बनाया है। अकाली दल अमृतसर की ओर से सांसद सिमरनजीत सिंह मान के बेटे ईमान सिंह मान को यहां मैदान में उतारा है। इसके साथ ही सिख सद्भावना दल और शिव सेना शिंदे ग्रुप की ओर से अपने अपने उम्मीदवार घोषित किए गए हैं।
पहली बार भाजपा व अकाली दल अलग-अलग है मैदान में
पहली बार है कि इस सीट पर भाजपा और अकाली दल बादल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि पहले दोनों पार्टियां मिलकर कांग्रेस को टक्कर देती रही हैं। इस बार यहां मुकाबला चौकोना बना हुआ है। इस चौकोने मुकाबले में किसी एक उम्मीदवार को विजय हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत करने की जरूरत है, तभी वह अपनी चुनावी नैय्या पार कर सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि उम्मीदवार अपना पूरा जोर प्रचार में लगा रहे हैं परंतु इस बार जीत का रास्ता किसी के लिए भी आसान नहीं दिखाई दे रहा है।
मुद्दों पर फोकस होने लगा चुनाव प्रचार
पिछले दो-तीन दिनों से अमृतसर सीट पर अब चुनाव प्रचार मुद्दों पर फोकस होने लगा पड़ा है। प्रचार में स्थानीय मुद्दे, पंथक, किसान, कृषि मजदूर, उद्योग, रोजगार, नशा, गैर कानूनी माइनिंग, बढ़ रहा अपराधों का ग्राफ, बॉर्डर, विकास, उच्च शिक्षा, राज्य की पार्टी बनाम दिल्ली से चलते पार्टियों के मुद्दे उठाए जा रहे हैं। इस बार चुनाव प्रचार रैलियों में उतनी भीड़ नहीं दिखाई दे रही है जितनी कि पिछले चुनाव प्रचार के दौरान दिखाई दे रही थी।
कौन कब-कब रहा विजयी
इस लोकसभा सीट पर वर्ष 1952 से लेकर 1962 में कांग्रेस के गुरमुख सिंह मुसाफिर विजयी रहे। 1967 में भारतीय जनसंघ के यज्ञदत्त शर्मा विजयी हुई। 1971 में कांग्रेस के दुर्गादास भाटिया जीते। उनके बाद 1972 में हुए उप चुनावों के दुर्गादास के भाई रघुनंदन लाल भाटिया कांग्रेस से विजयी हुए। 1977 में जनता पार्टी के बलदेव प्रकाश विजयी रहे। 1980 और 1984 में इस सीट पर दो बार कांग्रेस के रघुनंदन लाल भाटिया विजयी रहे। 1991 में आजाद उम्मीदवार कृपाल सिंह विजयी हुए। 1991 और 1996 में दोबारा कांग्रेस के रघुनंदन लाल भाटिया विजयी हुए। 1998 में भाजपा के दया सिंह सोढी जीते। 1999 में दोबारा कांग्रेस के रघुनंदन लाल भाटिया जीते। 2004, 2007 व 2009 में भाजपा के नवजोत सिंह सिद्धू विजयी रहे। वर्ष 2014 में कैप्टन अमरिंदर सिंह यहां से सांसद बने। इसके बाद 2017 और 2019 में गुरजीत सिंह औजला अमृतसर सीट से विजयी रहे। वर्ष 2014 में भाजपा के अरुण जेटली कैप्टन अमरिंदर से हार गए थे। अमृतसर सीट पर 20 मुकाबलों में से 12 पर कांग्रेस विजयी रही है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के मध्य मुकाबला रहा था। इसमें भाजपा के आईएएस अधिकारी हरदीप पुरी हार गए और गुरजीत औजला जीत गए थे।
किसने मिले कितने वोट
वर्ष 2019 क चुनावों में कांग्रेस को कुल वोटों में से 52 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि भाजपा को 40 प्रतिशत वोट मिले थे।
वर्ष 2014 में इस सीट पर कांग्रेस को 47.49 प्रतिशत और भाजपा को 37.74 प्रतिशत वोट मिले थे।
वर्ष 2017 उप चुनावों में कांग्रेस को 50.09 प्रतिशत और भाजपा को 30.45 प्रतिशत वोट मिले थे।
वर्ष 2009 में भाजपा को 48.13 प्रतिशत और कांग्रेस को 47.29 प्रतिशत वोट मिले थे।
वर्ष 2007 के उप चुनावों में भाजपा को 50.60 प्रतिशत और कांग्रेस को 41.77 प्रतिशत वोट मिले थे।
वर्ष 2004 में भाजपा को 55.38 प्रतिशत और कांग्रेस को 39.99 प्रतिशत वोट मिले थे।
वर्ष 1999 के चुनावों में कांग्रेस को 50.29 प्रतिशत और भाजपा को 44.87 प्रतिशत वोट मिले थे।
वर्ष 1998 में भाजपा को 56.07 प्रतिशत व कांग्रेस को 41.92 प्रतिशत वोट मिले थे।
1996 में कांग्रेस को 41.03 प्रतिशत और भाजपा को 35.88 प्रतिशत वोट मिले थे।
हलके से जीतने वाले कांग्रेस के नेताओं ने कभी समस्याओं को ठीक से उठाया ही नहीं। ऐसे में अमृतसर हमेशा अपने हक से वंचित रहा, जो कि उसे मिलना चाहिए था। जनता अब ऐसे उम्मीदवार को वोट देगी, जो कि उनकी आवाज बुलंद करे।
-प्रो सरचांद सिंह, मीडिया प्रभारी, भाजपा
कांग्रेस अमृतसर जिले में पूरी तरह मजबूत है। हलके से कांग्रेस के सांसद रहे गुरजीत सिंह औजला जीत की हैट्रिक बनाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि शिअद-भाजपा के अलग-अलग चुनाव लड़ने से कांग्रेस को फायदा होगा।- एडवोकेट गगन भाटिया, मीडिया सचिव, कांग्रेस
अमृतसर की सीट एक पंथक सीट है। ग्रामीण सीटों पर अकाली दल का वोट बैंक काफी प्रभाव रखता है। अमृतसर की नौ सीटों में से 6 सीटों पर अकाली दल का भारी वोट बैंक है जो अकाली उम्मीदवार की तरफ ही जाएगा।
किरणप्रीत सिंह मोनू, नेता, अकाली दल बादल
आम आदमी पार्टी ने पंजाब में सरकार बनाने के बाद दो वर्षों में ही वह काम कर दिए हैं जो रिवायती पार्टियां पिछले 75 वर्षों के दौरान नहीं कर पाई है। आम आदमी पार्टी शिक्षा व सेहत पर फोकस करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस पर काम कर रही है।
इकबाल सिंह भुल्लर, प्रभारी, अमृतसर लोकसभा सीट, आप