सर्टिफिकेट जारी करने का काम 15 वर्किंग डे के अंदर होगा। कैबिनेट ने फैक्ट्रीज एक्ट, इंडस्ट्रीज डिस्प्यूट एक्ट और कांट्रैक्ट लेबर एक्ट में संशोधन को मंजूरी दी है। फैक्ट्री एक्ट में कुछ सेक्शनों में संशोधन के साथ आर्डिनेंस के जरिए नया सेक्शन 106 बी शामिल किया गया है। इसके तहत बिजली या बिना बिजली के चलने वाली फैक्ट्रियों में वर्करों की सीमा 10-20 से बढ़ाकर 20-40 हो जाएगी।
इंस्पेक्टर की शिकायत पर किसी अपराध के बारे में राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही अदालत द्वारा संज्ञान लिया जाएगा। मौजूदा धाराओं के तहत अपराधों की कंपाउंडिंग का प्रबंध नहीं है जिसके चलते केस ज्यादा होते हैं। मुकदमेबाजी को घटाने के लिए कंपाउंडिंग का प्रावधान किया गया है।
एक अन्य फैसले के तहत छंटनी, दोबारा संभाल या बंद करने संबंधी उपबंधों को लागू करने के लिए कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या 100 से 300 कर दी गई है जबकि नोटिस की अवधि तीन माह होगी। कांट्रैक्ट लेबर एक्ट में संशोधन से वर्करों की सीमा 20 से 50 हो जाएगी।
राज्य के विभिन्न सरकारी मुलाजिम जत्थेबंदियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी करते हुए सरकार ने न्यू ईयर गिफ्ट दिया है। कैबिनेट ने नई पेंशन स्कीम के तहत मुलाजिमों के लिए एक अप्रैल 2019 से अपना हिस्सा बढ़ाने का फैसला किया है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में हुई कैबिनेट मीटिंग में प्राथमिक वेतन और मंहगाई भत्तों के दस प्रतिशत के बराबर सरकार के योगदान को बढ़ा कर 14 फीसदी करने पर मोहर लगाई गई।
यह फैसला केंद्र सरकार के वित्तीय सेवाओं संबंधी विभाग द्वारा 31 जनवरी 2019 को जारी नोटिफिकेशन से संबंधित है। कैबिनेट ने मृत्य-कम-सेवा मुक्ति ग्रेच्युटी का लाभ सभी मुलाजिमों को देने का फैसला किया है। इसमें एक जनवरी 2004 को या उसके बाद नई पेंशन स्कीम के दायरे में आने वाले मुलाजिम भी शामिल होंगे।
पुरानी पेंशन स्कीम की तरह एक जनवरी 2004 या उसके बाद भर्ती मुलाजिम की नौकरी के दौरान मौत होने पर उसके परिजनों को एक्स ग्रेशिया का लाभ देने के वित्त विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। पंजाब के कुल 353074 सरकारी मुलाजिमों में से 152646 नई पेंशन स्कीम के दायरे में हैं।
2018-19 के दौरान सरकार ने मुलाजिमों के प्राथमिक वेतन जमा डीए के दस प्रतिशत सालाना योगदान मे 585 करोड़ अदा किए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान 645 करोड़ अदा किए जाने की उम्मीद है। क्योंकि नई पेंशन स्कीम में केंद्र सरकार की लगभग सभी हिदायतों को अपनाया गया है। मासिक मैचिंग योगदान 14 प्रतिशत होने के बाद 258 करोड़ का और आर्थिक बोझ पड़ेगा।
जीएसटी में केंद्रीय एक्ट की तर्ज पर संशोधन को आएगा ऑर्डिनेंस
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (संशोधन) एक्ट 2017 में केंद्रीय जीएसटी एक्ट की तर्ज पर जरूरी संशोधन करने के लिए सरकार ऑर्डिनेंस लाएगी। सूबे में व्यापार को प्रोत्साहित करने के मकसद से कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स ऑर्डिनेंस 2019 पर मोहर लगाई। जिससे केंद्र द्वारा वित्त बिल के जरिए केंद्रीय एक्ट में किए संशोधन को सूबे के जीएसटी एक्ट में लागू किया जा सके।
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब के एक्ट के कुछ सेक्शनों की शब्दावली केंद्रीय एक्ट के कुछ सेक्शनों से अलग रहेगी। केंद्र द्वारा सेक्शन 168 में की तब्दीली पंजाब में करने की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि जीएसटी काउंसिल की जून 2019 में हुई मीटिंग के दौरान केंद्रीय एक्ट में कई संशोधन करने की सिफारिश की गई थी।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वे लागू हो गए। जिसके चलते पंजाब के एक्ट में भी संशोधन जरूरी था। इसके तहत सिर्फ वस्तुओं के सप्लायर की ऊपरी छूट सीमा 25 लाख से बढ़ कर 40 लाख हो जाएगी। करदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से नकदी एक से दूसरी जगह भेजने की सहूलियत मिलेगी।
अब इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए गांवों में जमीन लेना आसान हो जाएगा। पंजाब कैबिनेट ने द पंजाब विलेज कॉमन लैंड यूज (रेगुलेशन) रूल्स 1964 में संशोधन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसका मकसद औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना और गांवों में लैंड बैंक की स्थापना है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में हुई मीटिंग में फैसला किया गया कि संशोधनों को विधिबद्ध रूप दिया जाए ताकि पंचायतों को लाभ मिलना यकीनी बनाया जा सके।
उनके हित में केस दर केस के आधार पर फैसले लिए जाएं। उद्योग विभाग और पंजाब स्माल इंडस्ट्री एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन को इसके लिए अधिकृत किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे शामलात जमीनों की कीमत बढ़ेगी, पंचायतें तेजी से विकास कर सकेंगी। नए नियम के तहत शामलात जमीन औद्योगिक प्रोजेक्टों के लिए उद्योग विभाग व पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कार्पोरेशन (पीएसआईईसी) को ट्रांसफर की जा सकेगी।
पंचायत राज्य सरकार की मंजूरी से भुगतान की शर्तों पर तब्दील कर सकेंगी। कीमत तय करने को एक कमेटी गठित की जाएगी। जिस एजेंसी को जमीन ट्रांसफर होनी है, उसे 25 फीसदी रकम देनी होगी। बकाए के भुगतान की शर्तें अलग से नोटीफाई होंगी। गौरतलब है कि उद्योग विभाग ने नियम 12-ए में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था।
राज्य सरकार ने पटियाला में ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और नॉलेज पार्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा था जिसके लिए 1000 एकड़ पंचायती जमीन चाहिए। अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत इसे इंटिग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर माना जाएगा। इसके लिए पांच गावों में जमीन की शिनाख्त की गई है।
इसे सीएम की प्रधानगी में हुई औद्योगिक व व्यापारिक विकास बोर्ड की मीटिंग में मंजूरी दे दी गई है। पीएसआईईसी 357 करोड़ में यह जमीन खरीदेगा। पीएसआईईसी को पंचायती जमीन पर औद्योगिक पार्क लगाने के और प्रस्ताव भी मिले हैं। केंद्र सरकार ने भी अमृतसर-कोलकाता कॉरिडोर के विकास के लिए जल्द जमीन मुहैया करवाने को कहा है। इसके लिए केंद्रीय वित्त मंत्री की अगुवाई में उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया है।