नेशनल कौंसिल आफ टीचर्स एजुकेशन के नियमों के मुताबिक बारहवीं पास और ईटीटी उम्मीदवार नौकरी के लिए योग्य हैं। अब भर्ती के लिए ग्रेजुएशन की शर्त थोप दी गई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सूबे के सरकारी स्कूलों में 30 हजार से अधिक अध्यापकों के पद रिक्त पड़े हैं। दूसरी तरफ नौकरी मांगते नौजवानों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय घर-घर नौकरी देने और 2500 रुपये बेरोजगारी भत्ता देने का वादा करने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह अब बेरोजगारों को नौकरी तो क्या, बैठक के लिए समय भी नहीं दे रहे हैं।
इस संगठनों ने दिया समर्थन
भारतीय किसान यूनियन उग्राहां के सुखपाल सिंह कणकवाल, भाकियू डकौदा के मनजीत धनेर, क्रांतिकारी किसान यूनियन, पंजाब किसान यूनियन के सुखदेव लेहल कलां, किरती किसान यूनियन के भुपिंदर लौंगोवाल, जम्हूरी किसान सभा के भीम सिंह आलमपुर, मजदूर मुक्ति मोरचा के गोबिंद छाजली, पेंडू मजदूर यूनियन के बहाल बेनड़ा, डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के दविंदर पूनिया, बलवीर चंद लौंगोवाल, गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन के सुखविंदर चाहल, पंजाब सबार्डिनेट सर्विसिज फेडरेशन के सुखदेव चंगालीवाला, डेमोक्रेटिक मुलाजिम फ्रंट, अध्यापक संघर्ष कमेटी के देवी दयाल, नौजवान भारत के सुखजिंदर सिंह, इंकलाबी लोक मोरचा के स्वर्णजीत सिंह, तर्कशील सोसाइटी के परमवेद, जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के बिक्कर सिंह हथोआ, हरजिंदर झुनीर, मनधीर सिंह, रघवीर सिंह भवानीगढ़, हरभगवान भीखी, प्रदीप गुरु बेरोजगार अध्यापकों के समर्थन में पहुंचे। संगठनों ने बेरोजगार अध्यापकों का पूर्ण समर्थन करते कहा कि यदि उनकी मांगों को स्वीकार न किया गया तो संघर्ष को और तेज कर दिया जाएगा।