अप्रैल में बच्चे की नई कक्षा के दाखिले और किताबी खर्च ने अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है। निजी स्कूलों में रि-एडमिशन, एनुअल चार्जेज के नाम पर तो मोटी रकम वसूली ही जा रही है, निमयों के खिलाफ जाकर स्कूलों से ही बच्चों की किताबें व अन्य सामान खरीदने के लिए विवश किया जा रहा है।
कपूरथला में लगभग 270 आईसीएसई, सीबीएसई और पीसीईबी से मान्यता प्राप्त स्कूल हैं। अभिभावक को राहत देने के लिए न तो शिक्षा विभाग गंभीर दिखाई दे रहा है और न ही जिला प्रशासन।
परीक्षाओं के बाद बच्चे को नई कक्षा में एडमिशन करवाने के लिए निजी स्कूल मनमाने ढंग से अभिभावक को लूट रहे हैं। अलग-अलग बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल आपस में पूल करके एक निजी पब्लिशर से अनुबंध करके मोटी रकम कमा रहे हैं। हालांकि ऐसा करना गैर-कानूनी है।
फिर भी इन शिक्षण संस्थानों पर नकेल कसने की तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं है। निजी स्कूलों ने कुछ स्थानीय बुक सेलर से सांठगांठ करके उनको स्कूलों के अंदर ही बुक बेचने के लिए स्थान देने की व्यवस्था की है। एनसीईआरटी की वाजिब और किफायती किताबें लगाने के बजाय निजी स्कूल प्रबंधक एनसीईआरटी के सिलेबस पर आधारित निजी पब्लिशर की किताब को तवज्जो देते हैं।
अभिभावकों के अनुसार कि निजी संस्थान में हजारों रुपये का एडमिशन, किताबें और स्टेशनरी अपने स्तर पर ही देने को मजबूर किया जा रहा है।
डीईओ सेकेंडरी गुरभजन सिंह लासानी ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आ गया है, वह जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएंगे। डीसी कपूरथला जसकिरण सिंह ने कहा कि निजी स्कूलों की लूट रोकने के लिए एसडीएम सतवंत सिंह, डीईओ एलीमेंटरी गुरचरण सिंह मुल्तानी और डीईओ सेेकेंडरी गुरभजन सिंह लासानी पर आधारित तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। यह टीम लगातार जिले में दो-तीन निजी स्कूलों की जांच करेगी।
अभिभावकों के लिए विकल्प है- कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-1986
निजी स्कूलों के खिलाफ कोई भी अभिभावक कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दे सकता है। शिक्षण सेवाएं कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-1986 के अधीन आती हैं। बाकायदा सेशन 2016-17 में निजी स्कूलों की फीस बढ़ोत्तरी और अन्य लूट-खसूट के खिलाफ रिटायर्ड जस्टिस अमरदत्त के नेतृत्व में एक कमेटी भी गठित की गई है। इनका पता कमरा नं.23, दूसरा तल, ब्लाक-एफ, विद्या भवन, फेज-2, एसएएस नगर, मोहाली है, जहां लिखित शिकायत दी जा सकती है।