मीडिया से बातचीत करते हुए बीबी किरणजोत कौर ने कहा कि सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था का दफ्तर सियासी दखलंदाजी के कारण तहस-नहस हो गया है। एसजीपीसी के फैसलों में सियासी दखल बढ़ गया है। लापता पावन स्वरूपों के मामले में जो कार्रवाई हो रही है, वह एक दिखावा भर है। लौंगोवाल ने एक मुखौटा डाल रखा है और कार्रवाई तो पर्दे के पीछे से चल रही है।
बीबी किरणजोत कौर के अनुसार एसजीपीसी में हर फैसला अध्यक्ष के आदेशानुसार होता है। एसजीपीसी के मुख्य सचिव कमेटी अध्यक्ष के फैसलों को लागू करवाते हैं। केवल मुख्य सचिव पर कार्रवाई कर लौंगोवाल अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। एक जवाब में किरणजोत कौर ने कार्यकारिणी की ओर से मुख्य सचिव का इस्तीफा स्वीकार करने पर एतराज जताते हुए कहा कि अगर इस मामले में मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह आरोपी हैं तो उन्हें चार्जशीट क्यों नहीं किया गया।
इस संवेदनशील मामले में केवल इस्तीफा लेकर मुख्य सचिव को ‘बरी’ कर देने से बात नहीं बनेगी। जब उनसे यह पूछा गया कि एसजीपीसी ने इस मामले पर यू टर्न क्यों लिया, इस पर बीबी कौर का कहना था कि कार्यकारिणी ने संगत के बढ़ रहे दबाव के कारण पहले जल्दबाजी में एसजीपीसी के 16 अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी गई। जब ठंडे दिमाग से सोचा तो कानूनी कार्रवाई का फैसला वापस ले लिया।