पंजाब में आए दिन युवा नशे के कारण जान गंवा रहे हैं। ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब पंजाब के किसी शहर, कस्बे या गांव से नशे की ओवरडोज से मौत की खबर न आती हो। सरकार ने बड़ी संख्या में नशा छुड़ाओ केंद्र स्थापित किए हैं। बहुत से एनजीओ भी इसी अभियान में लगे हैं। इसके बावजूद इन केंद्रों में इलाज के बाद भी बड़ी संख्या में युवा दोबारा नशे की लत का शिकार हो रहे हैं।
सरकारी मान्यता प्राप्त अमृतसर के नवजीवन नशा छुडाओ केंद्र की एक रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न केंद्रों में इलाज के बाद भी 72 से 75 प्रतिशत पीड़ित फिर नशे के जाल में दोबारा फंस जाते हैं। सिर्फ 30 से 33 प्रतिशत नौजवान ही नशे से तौबा कर वापस समाज की मुख्यधारा में लौट पाते हैं। सरकार सप्लाई व बिक्री पर अंकुश नहीं लगा पाने में नाकाम रही है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत सिंह कहते हैं कि जब तक नशे के शिकार युवा को इलाज के बाद उसके पुराने नेटवर्क से बाहर नहीं किया जाता, तब तक उसका नशा छुड़वाना मुश्किल है।
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नवजीवन नशा छुड़ाओ केंद्र के संचालक हरपाल सिंह कहते हैं कि नौजवानों का बुरी संगत में पड़ना, बेरोजगारी, आर्थिक तंगी, खाली रहना नशे के जाल में फंसने के मुख्य कारण हैं। इस केंद्र में अब तक 2700 से अधिक नशेड़ी युवकों का सफल इलाज हो चुका है। उनका कहना है कि यहां से युवक ठीक होकर जाते हैं, लेकिन शहरों व गांवों में नशा खुलेआम बिकने के चलते फिर इसी दलदल में फंस जाते हैं।
कोविड के समय आई थी नशे की उपलब्धता में कमी
डॉ. अमरजीत सिंह कहते है कि कोविड के समय लॉकडाउन के चलते युवकों को नशा मिलना बंद हो गया था। इस दौरान जिन युवाओं का इलाज हुआ वह बाद में दोबारा नशा की दलदल में नहीं फंसे। वर्ष 2021 में फिर नशेड़ी युवाओं की संख्या बढ़नी शुरू हो गई थी। पंजाब सरकार के नशा तस्करों व सेवन करने वालों के खिलाफ शुरू किए अभियान के कुछ हद तक नियंत्रण हुआ, लेकिन जैसे ही अभियान ठंडा हुआ, ऐसे युवाओं की संख्या फिर बढ़ने लगी।
पंजाब में 74 नशा छुड़ाओ केंद्र
पंजाब में इस समय कुल मान्यता प्राप्त केंद्र 74 नशा छुड़ाओ केंद्र हैं। अमृतसर में मेडिकल काॅलेज में एक सरकारी और चार प्राइवेट मान्यता प्राप्त केंद्र, रामतीर्थ रोड, लोहारका रोड, जंडियाला और बाबा बकाला में चल रहे हैं। कुछ गैर मान्यता प्राप्त केंद्र भी हैं। जनवरी 2014 से लेकर 2023 तक अमृतसर जिले के अलग-अलग केंद्रों में 12 हजार से अधिक नशा करने वाले युवाओं का सफल इलाज हो चुका है, लेकिन 20 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनका दो या तीन बार इलाज हुआ है।
और सख्ती करेगी पुलिस: डीसीपी
डीसीपी अमृतसर परमिंदर सिंह भंडाल कहते हैं कि नशे की बिक्री पर सख्ती से कंट्रोल किया जा रहा है। बिक्री करने वालों को बड़ी संख्या में जेल भेजा गया है। नशा तस्करों को पकड़ने के लिए भी पुलिस लगातार अभियान चला रही है। पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले नशे का सेवन करने वालों में भी कमी आई है। पुलिस अब और सख्ती करेगी।